मुंबई, छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और बीजेपी सांसद संभाजी राजे ने आज (26 फरवरी, शनिवार) से अनशन शुरू कर दिया है. मराठी आरक्षण की मांग को लेकर संभाजी राजे ने अपना अनशन मुंबई के आजाद मैदान में शुरू किया है. संभाजी राजे का साथ देने के लिए महाराष्ट्र भर से हजारों की तादाद में युवा मुंबई के आजाद मैदान में पहुंच रहे हैं. संभाजी राजे ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार पर आरोप लगाया है कि वो मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है, इसलिए क्षुब्ध होकर वे हंगर स्ट्राइक के लिए मजबूर हुए हैं. संभाजी राजने ने अनशन पर बैठते हुए कहा कि मराठा आरक्षण कब तक मिलेगा यह कहा नहीं जा सकता. इसमें वक्त भी लग सकता है. लेकिन हमने इस मुद्दे पर काम को आगे बढ़ाने के लिए सात मांगें की थीं. उनमें से एक भी मांग पूरी नहीं हुई.
संभाजी राजे ने अनशन शुरू करते हुए मीडिया से बातचीत में कहा, ‘सरकार ने कहा था कि 15 दिनों के अंदर वह उन मांगों को मंजूर करेगी. लेकिन आज तक इस पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद रायगढ़ और नांदेड़ में आंदोलन किए गए. लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं हुआ. सरकार द्वारा इस मुद्दे को लगातार नज़रअंदाज़ किए जाने की वजह से अब मुंबई आकर अनशन करने के सिवा और कोई चारा नहीं बचा.’
संभाजी राजे ने कहा, ‘मराठा समाज को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग होने के आधार पर आरक्षण दिया गया था. लेकिन बाद में इसे सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया. कोर्ट ने मराठा समाज को पिछड़ा मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद मैंने फिर इस मुद्दे पर आरक्षण की मांग लिए उचित तैयारी शुरू की. केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं और रुकावटों को दूर करें. रिव्यू पिटीशन दायर करना राज्य की जिम्मेदारी है. आरक्षण एक लंबे समय तक चलने वाला मुद्दा है. इसके लिए कितना वक्त लगेगा, यह मैं नहीं बता सकता. मैं वकील नहीं हूं. मैं आंदोलन कर सकता हूं.’
आगे संभाजी राजे ने कहा ‘कोल्हापुर में हमने मूक मोर्चा निकाला. हजारों लोग आंदोलन में शामिल हुए. इसके बाद सरकार ने हमें बुलाया. बैठक में मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री बैठे थे. तब मैंने मराठा आरक्षण के लिए तैयारियों से जुड़ी छह-सात मांगें रखीं. सरकार ने 15 दिनों में उन मांगों को मानने की बात कही. मैंने कहा कि आप दो महीने लीजिए, लेकिन काम पूरा कीजिए दो महीने हो गए एक भी मांग पूरी नहीं हुई.’
इसके बाद अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए संभाजी राजे ने कहा, ‘इसके बाद हमने नांदेड़ में आदोंलन किया, रायगढ़ में आंदोलन किया. लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं हुआ. ऐसे में अनशन करने के अलावा मेरे पास अब कोई और उपाय नहीं रह गया है. इस मुद्दे को राज्य सरकार हल्के में ना ले इसलिए मैंने आमरण अनशन शुरू किया है. 17 जून को मैंने जो मांगें रखी थीं, वही मांगें अब भी कायम हैं.’





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