मुंबई, बांबे हाई कोर्ट ने शनिवार को लवासा हिल स्टेशन परियोजना के लिए दी गई अनुमति पर कोई आदेश पारित करने से इन्कार कर दिया। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी तंत्र पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले के प्रभाव व दबदबे के कारण इस हिल स्टेशन का विकास हुआ।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस गिरीश कुलकर्णी की खंडपीठ ने अधिवक्ता नानासाहेब जाधव की तरफ से दाखिल एक जनहित याचिका का निपटारा किया। इसमें लवासा के विकास के लिए विकास आयुक्त (उद्योग) द्वारा दी गई विशेष अनुमति को अमान्य, मनमानी, अनुचित व राजनीतिक पक्षपात पर आधारित घोषित करने की अपील की गई थी।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में लवासा हिल स्टेशन परियोजना को ‘शरद पवार के दिमाग की उपज’ बताया। अदालत ने आदेश में कहा, ‘याचिकाकर्ता की अपील का मूल बिंदु यह है कि पवार परिवार के सदस्य अपनी राजनीतिक कद के कारण बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली हैं। सरकारी तंत्र पर उनके राजनीतिक प्रभाव व दबदबे के इस्तेमाल से लवासा हिल स्टेशन परियोजना का विकास हुआ।’ जनहित याचिका में राकांपा प्रमुख शरद पवार, उनकी बेटी व लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले तथा भतीजे व महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार को प्रतिवादी बनाया गया था। हालांकि, जवाब में केवल अजीत पवार ने हलफनामा दाखिल किया। याचिका में निजी हिल स्टेशन लवासा के लिए जमीन खरीदने के मकसद से लेक सिटी कारपोरेशन को दी गई विशेष अनुमति को रद करने की मांग की गई थी।
बांबे हाई कोर्ट ने कहा कि लोगों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले आजीविका के अधिकार में सुरक्षित इमारतों और घरों में रहने का अधिकार भी शामिल है। जो भी इमारत का मालिक है (चाहे वह निजी हो या सार्वजनिक निकाय) उसका यह संवैधानिक दायित्व है कि इस बात को सुनिश्चित करे कि लोग सुरक्षित तरीके से घरों और भवनों में रह सकें। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ ने मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में कई इमारतों के ढहने पर स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाया। याचिका में अदालत का राज्य भर में पनप रहे अवैध ढांचों पर भी ध्यान दिलाया गया। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं, जहां इमारत गिरने से लोगों की जान चली जाती है, को पूरी तरह से खत्म करने की जरूरत है।हाई कोर्ट ने कहा कि इमारत के मालिक (निजी या सार्वजनिक निकाय) का संवैधानिक दायित्व है वह यह सुनिश्चित करे कि इमारत में रहने वालों का जीवन खतरे में न पड़े। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि एक ऐसा तंत्र स्थापित करने की जरूरत है, जिसमें संबंधित नागरिक या राज्य के अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में इमारतों का आडिट कराएं। जिन इमारतों को जर्जर अधिसूचित किया गया है, उन्हें खाली किया जा सकता है। अवैध निर्माण के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
बांबे हाई कोर्ट ने एलगार परिषद-नक्सली संपर्क मामले के आरोपित वरवर राव की जमानत शनिवार को तीन मार्च तक के लिए बढ़ा दी। हाई कोर्ट ने फरवरी 2021 में स्वास्थ्य आधार पर छह महीने के लिए 82 वर्षीय कवि कार्यकर्ता राव की जमानत मंजूर की थी। उन्हें मुंबई नहीं छोड़ने के लिए कहा गया था। राव ने उसके बाद जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए अर्जी दाखिल की और बीमारी के आधार पर स्थायी जमानत देने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की। कोर्ट सितंबर 21 से ही कई बार समर्पण की तारीखें बढ़ाता चला आ रहा है।शनिवार को राव के वकील ने उनकी नई याचिका दाखिल कर जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की। जस्टिस एसबी शुक्रे और जस्टिस एएम बोरकर ने उनकी याचिका पर सुनवाई की। राव ने अपनी याचिका में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार वह गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। उन्होंने जमानत की शर्त में संशोधन कर अपने निवास राज्य तेलंगाना लौटने की अनुमति देने का आग्रह किया है। कोर्ट उनकी इस याचिका पर एक मार्च को सुनवाई करेगा।





Users Today : 2
Users Yesterday : 4
Users Last 7 days : 48
Users Last 30 days : 276
Users This Month : 127
Users This Year : 2909
Total Users : 64116
Views Today : 8
Views Yesterday : 9
Views Last 7 days : 84
Views Last 30 days : 368
Views This Month : 180
Views This Year : 3495
Total views : 99518
Who's Online : 0


