मुंबई, वैश्विक महामारी कोरोना के कारण पहले से ही परेशान रहे दुनियाभर के देशों की मुसीबतें यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण और बढ़ी हैं। उस पर हिंदुस्थान में मोदी सरकार की गलत नीतियां कोढ़ में खाज का कम कर रही हैं। लंदन स्थित स्वतंत्र आर्थिक अनुसंधान एजेंसी ‘कैपिटल इकोनॉमिक्स’ की रिसर्च से खुलासा हुआ है कि महंगाई १४ फीसदी बढ़ी है। इसके मुताबिक उभरते बाजारों में खाद्य वस्तुओं की कीमतें इस वर्ष १४ फीसदी बढ़ी है। इसमें हिंदुस्थान शामिल है।
गौरतलब है कि पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, रसोई गैस और जीएसटी की नई दरों के कारण हिंदुस्थान में महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें लोगों को सर्वाधिक परेशान कर रही हैं। घरेलू कीमतों को काबू में करने के लिए कई देशों ने खाद्य निर्यात पर पाबंदी लगा दी है। लोगों को खान-पान की चीजों के लिए १०-२० फीसदी तक ज्यादा दाम चुकाना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को समान मात्रा की वस्तु के लिए या तो ज्यादा रकम देनी पड़ रही है या फिर अपने खान-पान में कटौती करनी पड़ रही है यानी लोग पेट काटने को मजबूर हो रहे हैं। ‘कैपिटल इकोनॉमिक्स’ ने अनुमान जताया है कि अधिक मुद्रास्फीति के कारण विकसित बाजारों में इस साल और अगले साल भी खान-पान की वस्तुओं पर परिवारों को अतिरिक्त सात अरब डॉलर खर्च करने पड़ेंगे।
हिंदुस्थान में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार रसोई गैस सिलिंडर पर मिलनेवाली सब्सिडी को धीरे-धीरे खत्म कर रही है। सब्सिडी बंद करके सरकार ने अपने खजाने में करोड़ों रुपए जमा किए हैं। २०२०-२१ में वेंâद्र सरकार ने एलपीजी सब्सिडी के रूप में ११,८९६ करोड़ रुपए खर्च किए थे, वहीं २०२१-२२ में यह खर्च घटकर महज २४२ करोड़ रुपए रह गया है। इस तरह सब्सिडी को खत्म कर सरकार ने सिर्फ एक वित्त वर्ष में ही ११,६५४ करोड़ रुपए बचा लिए।





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