ठाणे, नासिक व नगर जिले में बच्चों से गुलामी करवाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि ठाणे और पालघर जिलों से बच्चों के बिकने की खबर सामने आई है। वह भी सिर्फ ५०० रुपए में। दरअसल, आदिवासी इलाकों में रहनेवाले लोगों की गरीबी और अज्ञानता का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व उनके बच्चों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इन दोनों जिलों से बिकनेवाले ४ बच्चों में से ३ बच्चों को बचाया गया है। इस प्रकरण में बच्चों को खरीदनेवालों के खिलाफ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है, जबकि एक बच्चे की तलाश अभी भी जारी है।
पुलिस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार अन्य जिलों के लोग ठाणे, पालघर में आकर आदिवासी परिसरों में रहनेवाले गरीब परिवारों को निशाना बनाते हैं। परिवार के सदस्यों से कहते हैं कि वे उनके बेटे अथवा बेटी का विशेष ध्यान रखेंगे और इतना ही नहीं, उनके बच्चों के बदले माता को रुपए भी देंगे। पुलिस के अनुसार ये रकम काफी मामूली होती है। किसी को ५०० तो किसी को १,००० रुपए दिए जाते हैं। एक बार अपने साथ ले जाने के बाद वे उन बच्चों से अपने घर के ढेर सारे काम करवाते हैं। यहां तक कि खरीददार बच्चों को शारिरिक व मानसिक यातनाएं भी देते हैं। qपुलिस और श्रमजीवी संस्था ने पिछले तीन दिनों के भीतर ४ बच्चों को बेचे जाने की जानकारी दी है, जिसमें से पुलिस और संस्था ने मिलकर ३ बच्चों को खोज निकालने के बाद उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया है। ठाणे पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त अशोक मोराले ने बताया कि संस्था के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार इन बच्चों को अवैध तरीके से बेचा गया था। श्रमजीवी संस्था के प्रमोद पवार ने बताया कि हम विभिन्न जगहों पर काम करनेवाले नाबालिग बच्चों को गुलामी से छुटकारा दिलाने के लिए काम करते हैं। विभिन्न प्रकार से जानकारी इकट्ठा कर हमने बच्चों को बचाया है।





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