ठाणे : सीबीआई ने त्रिपुरा चिटफंड घोटाले के एक मामले में वांछित आरोपी को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी से गिरफ्तार किया है. असम निवासी आरोपी बिकाश दास 2013 से फरार चल रहा था.
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार (3 फरवरी, 2025) को त्रिपुरा चिटफंड घोटाले के एक मामले में वांछित आरोपी बिकाश दास को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी से गिरफ्तार किया है. बता दें कि आरोपी असम के हैलाकांडी जिले के दास कॉलोनी पंचग्राम का रहने वाला है, जो 2013 से फरार चल रहा था.
बता दें कि त्रिपुरा सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की थी. बता दें कि बिकाश दास के खिलाफ 2 FIR दर्ज थी. अगरतला की विशेष सीबीआई अदालत ने बिकाश को भगोड़ा अपराधी घोषित किया था. 16 अगस्त 2024 को उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था. सीबीआई ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 20,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया था
तकनीकी इनपुट से पकड़ में आया आरोपी
सीबीआई लगातार आरोपी की तलाश कर रही थी. तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर बिकास दास को भिवंडी के कल्हार इलाके में उसके ठिकाने से गिरफ्तार किया गया.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, सीबीआई ने 7 मार्च 2023 और 15 मार्च 2023 और को 2 मामले दर्ज किए थे. उस समय बिकाश दास सूचना रियल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का निदेशक था. बता दें कि पहला मामला त्रिपुरा के कामलपुर थाने में 28 जून 2013 को दर्ज FIR नंबर 57/2013 से जुड़ा है, जिसे सीबीआई ने 15 मार्च 2023 को अपने हाथ में लिया था. इस मामले में आरोप है कि सूचना रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों ने निवेशकों को हाई रिटर्न का लालच देकर उनसे लाखों रुपये जुटाए, लेकिन 2012 में कंपनी अचानक बंद हो गई और निवेशकों का पैसा नहीं लौटाया. इससे निवेशकों को करीब 6,60,000 रुपये का नुकसान हुआ. सीबीआई ने इस मामले की जांच पूरी कर ली है. सीबीआई ने 21 जनवरी 2025 को आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें बिकाश दास, सुजीत दास और सूचना रियल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया है.
दूसरे मामले की जांच जारी
दूसरा मामला त्रिपुरा के तेलियामुरा थाना में 16 मई 2013 को दर्ज एफआईआर नंबर 51/2013 से जुड़ा है, जिसे सीबीआई ने 7 मार्च 2023 को अपने हाथ में लिया था. इस मामले की अभी जांच जारी है.
त्रिपुरा में 2010 से 2013 के बीच कई चिटफंड कंपनियां उभरी थीं, जिन्होंने गरीब और मध्यम वर्गीय निवेशकों से पैसे जुटाए. बाद में ये कंपनियां बंद हो गईं और लोगों का पैसा डूब गया. सहारा और रोज वैली सहित कई कंपनियों पर भी इसी तरह के आरोप लगे थे, जिसके बाद त्रिपुरा सरकार ने 2023 में ऐसे मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. अब सीबीआई लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी कर रही है.





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