मुंबई : महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। १०८ महाराष्ट्र इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (एमईएमएस) के तहत १२.८७ करोड़ की आबादी के लिए सिर्फ ९३७ एंबुलेंस उपलब्ध हैं। इनमें ७०४ बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और २३३ एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस शामिल हैं।
२०१४ में इस सेवा की शुरुआत के समय जनसंख्या ९.३७ करोड़ थी, लेकिन अब बढ़कर १२.८७ करोड़ हो चुकी है, जबकि एंबुलेंस की संख्या जस की तस बनी हुई है। कई अस्पतालों का दावा है कि कई एंबुलेंस मरम्मत में पड़ी रहती हैं, जिससे इमरजेंसी सेवाएं बाधित होती हैं। रिपोर्ट की मानें तो मुंबई में १.२५ करोड़ की आबादी के लिए सिर्फ ९१ एंबुलेंस उपलब्ध हैं, जिनमें से २६ एएलएस और बाकी बीएलएस हैं। ठाणे जिले में यह संख्या ३९ एंबुलेंस तक गिर जाती है, जिनमें से सिर्फ १२ एएलएस हैं।
समय पर नहीं पहुंच पाती एंबुलेंस : २३ जनवरी २०२५ को उल्हासनगर में राहुल इंदाटे नामक मरीज को ८ घंटे तक १०८ सेवा पर कॉल करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली, और उसकी मौत हो गई। इसी तरह बांद्रा स्टेशन के बाहर २६ दिसंबर २०२४ को ६९ वर्षीय व्यवसायी रामाशंकर सिंह की एंबुलेंस के इंतजार में जान चली गई।
सरकार नहीं मानी हाई कोर्ट के आदेश
२०१४ में मुंबई हाई कोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर एंबुलेंस तैनात करने का आदेश दिया था, लेकिन यह अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ।
मौजूदा संकट का हल नहीं
सरकार बाइक, बोट, एयर और वीआईपी एंबुलेंस लाने की बात कर रही है, लेकिन मौजूदा स्थिति सुधारने पर कोई ठोस योजना नहीं दिख रही है। बढ़ती आबादी के साथ यदि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह संकट और गहरा सकता है।





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