मुंबई : मानसून पूर्व नाले सफाई अभियान के तहत निकाली जा रही गंदगी और कचरा सड़कों पर ही छोड़ दिए जाने से नागरिकों में भारी रोष है। रिपोर्ट की मानें तो यह स्थिति न केवल दुर्गंध और गंदगी फैला रही है, बल्कि संभावित बारिश की स्थिति में पूरी सफाई प्रक्रिया को बेकार करने का खतरा भी उत्पन्न कर रही है। मनपा की यह सफाई प्रक्रिया हर साल की तरह इस बार भी २५ मार्च से शुरू हुई है, लेकिन वर्षों से एक जैसी पद्धति अपनाने के बावजूद आज तक कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई कि निकाली गई गंदगी को तुरंत निस्तारित किया जाए।
मनपा का तर्क है कि गंदगी को सूखने देने के बाद ही डंपिंग ग्राउंड तक ले जाया जाता है, लेकिन मुंबई जैसे शहर में जहां बेमौसम बारिश आम बात है, वहां यह नीति पूरी तरह असफल साबित हो रही है। शहर के कई इलाकों जैसे अंधेरी, धारावी, सायन आदि में सड़क किनारे पड़े गंदगी के ढेर न सिर्फ बदबू पैâला रहे हैं, बल्कि सड़क की जगह भी घेर रहे हैं, जिससे ट्रैफिक की समस्या और विकराल हो रही है। धारावी जैसी घनी बस्ती वाले क्षेत्र में पहले ही यातायात का दबाव अधिक है और अब इन गंदगी के ढेरों ने स्थिति और बिगाड़ दी है।
नागरिकों का कहना है कि अगर बारिश से पहले ही यह गंदगी वापस नालों में चली गई तो मनपा की करोड़ों रुपए की सफाई योजना पर पानी फिर जाएगा। क्या गंदगी को सुखाने और उठाने की कोई बेहतर वैकल्पिक प्रणाली नहीं अपनाई जा सकती? मनपा की ढीली कार्यप्रणाली और ठेकेदारों की लापरवाही ने इस सफाई अभियान को ही जनता के लिए सिरदर्द बना दिया है।





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