मुंबई: पूरे महाराष्ट्र में वर्ष 2020 से अब तक पूरे सोशल मीडिया पर डाले गए 20,567 आपत्तिजनक पोस्ट की पहचान महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने की है। इनमें से 53% यानी 10,897 पोस्ट विभिन्न आईटी प्लेटफॉर्म से समन्वय कर हटवा दिए गए। यह सामग्री मुख्य रूप से सांप्रदायिक नफरत, अफवाह, गलत जानकारी और मानहानि से संबंधित थी। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद 2,282 संदिग्ध यूआरएल (लिंक) भी चिन्हित किए, जिनमें से 675 हटाए या निष्क्रिय किए गए, जबकि 587 लिंक हटाने के अनुरोध अभी लंबित हैं।
कहां से फैलते हैं भड़काऊ पोस्ट?
जांच में पाया गया कि आपत्तिजनक सामग्री सबसे अधिक फेसबुक , इंस्टाग्राम और X पर पोस्ट की गई, जबकि मैसेजिंग ऐप वाट्सएप पर भी बड़ी संख्या में भड़काऊ संदेश प्रसारित हुए। अधिकतर पोस्ट में कोविड-19 महामारी से जुड़ी गलत जानकारी, राष्ट्रीय नेताओं की मॉर्फ्ड तस्वीरें व वीडियो, हिंसा भड़काने वाले संदेश और सांप्रदायिक सामग्री शामिल थी। महाराष्ट्र साइबर के डीआईजी संजय शिंत्रे ने बताया कि लोग इंटरनेट को गुमनाम समझकर संवेदनशील मैसेज डालते हैं, जो गंभीर अपराध है। दोषियों को तीन साल तक की सजा हो सकती है।
संवेदनशील मामले में बढ़ी निगरानी:
नागपुर हिंसा के बाद 140 से अधिक भड़काऊ पोस्ट और वीडियो की पहचान की गई। सीएम फडणवीस से संबंधित छेड़छाड़ किए विडियो को साझा करने पर 12 यूजर्स पर केस दर्ज किया गया।यवतमाल जिले से गिरफ्तार एक व्यक्ति तो बार-बार आईपी एड्रेस बदलकर हर शुक्रवार सांप्रदायिक मैसेज पोस्ट किया करता था। सूत्र बताते हैं कि साइबर पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए अब तक 84,705 से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। 65,000 से अधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए हैं।





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