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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी की पेंडिंग डेमोलिशन अपील्स फिर से शुरू करने की मांग खारिज की

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मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा लंबित अपील्स को फिर से खोलने की मांग को अस्वीकार कर दिया है। ये अपील्स गैर-कानूनी स्ट्रक्चर के लिए जारी डेमोलिशन नोटिस को रद्द करने के पुराने ऑर्डर्स के खिलाफ लंबित थीं। मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इस कदम के पीछे 2017 में कमला मिल्स आग की घटना का हवाला दिया था, जिसमें 14 लोगों की मौत और 55 लोग घायल हुए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सालों बाद केवल बाद की घटनाओं के आधार पर अपील को फिर से नहीं खोला जा सकता।
जस्टिस जितेंद्र जैन की अदालत ने डिटेल्ड ऑर्डर में करीब 26 सिविल अप्लीकेशन खारिज कर दीं। इन अप्लीकेशन्स में एक साल से लेकर लगभग नौ साल तक की देरी को माफ करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इतनी लंबी देरी को सही ठहराना संभव नहीं है और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक है। बीएमसी ने 2009 के सिटी सिविल कोर्ट के ऑर्डर को चुनौती देने की मांग की थी। उस समय कोर्ट ने मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत जारी डेमोलिशन नोटिस को रद्द कर दिया था। बीएमसी ने अपील सिर्फ 2018 में दायर की, जिससे आठ साल और 230 दिन की देरी हुई। कोर्ट ने यह माना कि इतनी लंबी देरी न्यायिक प्रक्रिया के दृष्टिकोण से अस्वीकार्य है।
बीएमसी की ओर से यह दावा किया गया कि 2017 में कमला मिल्स में आग लगने के बाद ही उसे इन कमियों के बारे में पता चला। कॉर्पोरेशन ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण कई उल्टे ऑर्डर्स को समय पर चुनौती नहीं दी जा सकी। बीएमसी ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि इन अपील्स को पुनः खोलने की अनुमति दी जाए ताकि पुराने मामलों की समीक्षा की जा सके। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में देरी के लिए कोई विशेष छूट नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अपील को फिर से खोलने का निर्णय केवल बाद की घटनाओं के आधार पर नहीं लिया जा सकता। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायिक प्रक्रिया में समय की गंभीरता का ध्यान रखना जरूरी है, और देर से उठाए गए कदम अक्सर न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं। इस फैसले के बाद BMC अब अपने पुराने मामलों के लिए नए रास्ते तलाशने के लिए मजबूर हो सकता है। कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हुआ कि लंबे समय से पेंडिंग अपील्स को फिर से शुरू करने के लिए केवल पिछली घटनाओं का हवाला देना पर्याप्त नहीं है।