Home State स्कूल अनुदान घोटाला की जांच 3 महीने के लिए बढ़ाई गई

स्कूल अनुदान घोटाला की जांच 3 महीने के लिए बढ़ाई गई

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अमरावती : राज्य के एजुकेशन सेक्टर को हिला देने वाले ‘शालार्थ प्राणायाम’ स्कैम की जड़ तक पहुंचने के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को आखिरकार एक्सटेंशन मिल गया है। क्योंकि सिस्टम में इनएलिजिबल टीचर्स और नॉन-टीचिंग स्टाफ के नाम गैर-कानूनी तरीके से डालने और करोड़ों की सैलरी के गबन की इस जांच का दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए सरकार ने इस टीम की टाइम लिमिट तीन महीने बढ़ाकर 8 मार्च से 7 जून, 2026 तक करने का फैसला किया है।
क्या है ‘शालार्थ’ स्कैम? शालार्थ राज्य सरकार का वह सेंट्रल सिस्टम है जिससे कर्मचारियों की सैलरी और सर्विस की जानकारी मैनेज की जाती है। हालांकि, 2012 से और खासकर 2019 के बाद हुई भर्ती प्रक्रिया में कुछ एजुकेशन अधिकारियों ने मिलीभगत करके नकली पहचान पत्र और इनएलिजिबल कैंडिडेट्स को इस सिस्टम में रखा। इससे यह पता चला है कि सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है। अकेले नासिक डिवीज़न में 1,530 टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों के खिलाफ 150 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
एसआईटी की अब तक की जांच का एक छोटा सा रिव्यू संदिग्ध दायरा: राज्य सरकार की तरफ से हाई कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक, इस घोटाले से जुड़ी 99 परसेंट से ज़्यादा नियुक्तियां शक के दायरे में हैं। फर्जी नियुक्तियां: शुरुआती जांच में पता चला है कि 622 में से 547 टीचरों की नियुक्ति फर्जी आयडी का इस्तेमाल करके की गई और उन्हें 20 से 30 लाख रुपये का पेमेंट किया गया। गिरफ्तारी का सिलसिला: अब तक इस मामले में शिक्षा विभाग के सीनियर डिप्टी डायरेक्टर, पे टीम सुपरिटेंडेंट और कई शिक्षा अधिकारियों समेत अहम लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बड़ी रकम का गबन: अनुमान है कि यह पूरा घोटाला करीब 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। टीम का अगला काम क्या है? डिविजनल कमिश्नर चंद्रकांत पुलकुंडवार की लीडरशिप में यह टीम अब मुंबई, नागपुर, नासिक, अमरावती, जलगांव, बीड और लातूर में है। यह टीम 2012 से राज्य भर में सभी भर्ती प्रोसेस, क्लियरेंस और ट्रांसफर की पूरी जांच करेगी। इस टीम का मुख्य मकसद उस सिस्टम का पर्दाफाश करना है जो बोगस टीईटी सर्टिफिकेट और नकली शालार्थ आयडी बनाता है।