वसई, कोरोना काल में संक्रमण से बचाव का हर कोई प्रयास कर रहा है। कोरोना के लक्षणों में गले में खराश, खांसी, नजला भी शामिल है। ऐसे में लोग इन दिनों ठंडी खाने-पीने की चीजों से परहेज कर रहे हैं। गर्मियों का मौसम होने की वजह से आमतौर पर इन दिनों प्रिâज का ठंडा पानी पसंद किया जाता है। खासकर शहरों में ये बात देखी जाती थी। लेकिन कोरोना के खौफ की वजह से अब शहर के लोगों ने भी पीने के पानी के लिए मिट्टी के बने मटकों, सुराहियों की ओर लौटना शुरू कर दिया है। क्योंकि पालघर जिले समेत वसई-विरार शहर में मटकों की मांग का काफी बढ़ गई है।
मिट्टी के मटकों की डिमांड बढ़ने से कुम्हारों का काम बढ़ गया है। साथ ही इन्हें बेचनेवाले भी उत्साहित हैं। कोरोना की दस्तक से पहले कुम्हारों की शिकायत रहती थी कि प्रिâज का चलन बढ़ने की वजह से शहरों में मिट्टी के मटकों को कोई नहीं पूछता, लेकिन अब स्थिति दूसरी नजर आ रही है। वसई-विरार शहर के बाजार में ५० रुपए से लेकर २००-३०० रुपए तक के मटके उपलब्ध हैं। यहां लोकल में बने माल के साथ गुजराती, राजस्थानी और अन्य राज्यों में बने मटके भी उपलब्ध हैं। इन मटकों में मिट्टी और बनावट का फर्क होता है। अब टोंटीवाले मटके भी उपलब्ध हैं। जैसे वॉटर डिस्पेंसर्स से पानी निकाला जाता है, वैसे ही इन मटकों से भी निकाला जा सकता है। लोग अब बाजार में अपने हिसाब से मिट्टी के मटके खरीद रहे हैं। मटका खरीदने आए ग्राहक राहुल तिवारी ने बताया कि डॉक्टर भी यही राय दे रहे हैं कि प्रिâज का ठंडा पानी या बर्फ का ठंडा पानी नुकसान कर रहा है इसलिए वे मटके जैसे पारंपरिक साधन को अपना रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार अगर आपके गले में खराश है और आप प्रिâज या बर्फ का ठंडा पानी पीते हैं, तो ये गले को और खराब करेगा। वहीं मिट्टी के मटके का पानी नॉर्मल टेम्परेचर का होता है, जो नुकसान नहीं देगा। हालांकि, मटके की लगातार सफाई होनी जरूरी है। मिट्टी के मटके बेचनेवाले बजरंगी कुम्हार ने बताया कि इस साल गर्मियों में मटकों की जितनी मांग देखी जा रही है, ऐसे हाल फिलहाल के वर्षों में पहले कभी नहीं देखी गई है। पिछले साल भी गर्मी के सारे महीने लॉकडाउन में बीत जाने की वजह से मटकों की बिक्री ने ऐसी तेजी नहीं पकड़ी थी, जैसी इस साल है। राज्य सरकार ने संचारबंदी लागू कर दी है। इसके बावजूद सुबह ७ बजे ११ बजे तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। इस साल कोरोना की दूसरी लहर जैसा प्रकोप दिखा रही है, उसे देखते हुए हर कोई अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक सचेत है।





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