मुंबई: महाराष्ट्र में सियासी गतिविधियां तेजी से बदलती नजर आ रही है। हाल ही में एक ओर जहां राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार की चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ बैठक हुई। इसके बाद शिवसेना की ओर से कहा गया कि 5 साल तक उद्धव ठाकरे ही मुख्यमंत्री रहेंगे। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि कांग्रेस अब स्थानीय चुनाव से लेकर लोकसभा तक सभी चुनाव अकेले लड़ेगी।
महाविकास अघाड़ी में शामिल होने के बाद एनसीपी और शिवसेना अगला विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ने की बात करती रहीं हैं, लेकिन कांग्रेस अपने इन दोनों सहयोगी दलों से सहमत नहीं दिखाई देती। प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस अगला चुनाव अकेले लड़ेगी। इससे पहले मुंबई कांग्रेस के नेता भी अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले मुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर ऐसा ही बयान दे चुके हैं। यदि कांग्रेस अपने इसी रुख पर कायम रही तो तीन दलों की महाविकास अघाड़ी बनाकर महाराष्ट्र में भाजपा को टक्कर देने की शरद पवार की योजना धूल धूसरित हो सकती है।
महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने अमरावती में कहा, ”मैं राज्य का कांग्रेस चीफ हूं। इसलिए अपनी पार्टी के विचार भी मैं ही रखूंगा। किसी दूसरी पार्टी का कोई नेता कांग्रेस के विचार नहीं रखेगा। मुझे नहीं पता कि शरद पवार ने क्या कहा, लेकिन कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अगले सभी स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों में पार्टी अकेले ही लड़ेगी।” इतना ही नहीं नाना पटोले ने कहा, कांग्रेस के कार्यकर्ता चाहते हैं कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी का बनना चाहिए। कार्यकर्ताओं के मन की बात सबके सामने रखना मेरी जिम्मेदारी है।
बता दें कि हाल ही में शरद पवार ने कहा था कि महाराष्ट्र में शासन कर रही महाविकास अघाड़ी सरकार न सिर्फ अपना कार्यकाल पूरा करेगी, बल्कि कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना मिलकर अगले विधानसभा व लोकसभा चुनावों में भी अच्छी सफलता हासिल करेंगी।
अटकलें लग रही हैं कि ढाई साल बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर एनसीपी की ओर से दावेदारी पेश की जाएगी। इससे महाविकास आघाड़ी सरकार में विवाद की चिंगारी भड़केगी। इनका खंडन करते हुए शिवसेना ने सामना में लिखा कि इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है। शिवसेना को मुख्यमंत्री पद का वचन ‘पांच’ साल के लिए दिया गया है। पांच साल तक उद्धव ठाकरे ही मुख्यमंत्री रहेंगे।





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