मुंबई, सचिन वाझे की वजह से क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट यानी सीआईयू बहुत बदनाम हुई है। लेकिन सीआईयू का स्वर्णिम इतिहास भी रहा है। किसी दौर में आम आदमी सीआईयू तक खुद सूचनाएं देने जाता था। ऐसी ही एक सूचना पर CIU ने मुंबई के एक बहुत बड़े उद्योगपति का अपहरण होने से बचा लिया था।
विलास तुपे उन दिनों इस सीआईयू के चीफ हुआ करते थे। उन्होंने एनबीटी को बताया कि मार्च, 1998 में एक बार एक लड़का तब के क्राइम ब्रांच के डीसीपी के.एल. प्रसाद के पास आया। वह बोला कि मुझे कुछ खबर देनी है। प्रसाद बोले बताओ क्या खबर है। लड़के ने कहा कि मैं टैक्सी चलाता हूं, मेरी टैक्सी को चार लोगों ने तीन दिन से इंगेज किया हुआ है। यह चार लोग टैक्सी में बात नहीं करते, उतर कर बात करते हैं। उस लड़के ने यह भी बताया कि सभी संदिग्ध जुहू के एक फ्लैट में रुके हुए हैं।
लड़के ने डीसीपी को यह भी बताया कि उसने पुलिस में आने से पहले अपनी गर्ल फ्रेंड के सााथ डिस्कस किया। गर्ल फ्रेंड ने ही उसे पुलिस को जाकर सूचना देने को कहा। गर्ल फ्रेंड ने कहा कि हो सकता है, यह लोग कोई बम ब्लास्ट करने वाले हों। इसमें तुम भी उड़ सकते हो और मैं भी।
डीसीपी प्रसाद ने फिर सीआईयू चीफ विलास तुपे को बोला कि आखिर पता करो कि यह लोग कौन हैं! तुपे उस टैक्सी ड्राइवर को लेकर फिर जुहू की उस बिल्डिंग के बाहर पहुंचे, जहां से चार लोग रोज उसकी टैक्सी में बैठते थे। ड्राइवर ने बाद में वह फ्लैट भी दिखाया। तुपे ने अपने टीम के साथ देर रात वहां रेड डाली। वहां कुल छह लोग मिले, जिनमें एक महिला भी थी। सभी आरोपियों के पास से पांच रिवॉल्वर भी मिलीं।
सभी आरोपी दुबई में एक अंडरवर्ल्ड सरगना से जुड़े थे और उस सरगना के संपर्क में थे। वह मुंबई में विले पार्ले के एक बहुत बड़े उद्योगपति का अपहरण करने आए थे। अपहरण के बाद उनका उद्योगपति के परिवार से 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का प्लान था।
आरोपियों ने पहले दादर में एक होटल बुक कराया। बाद में वे सभी जुहू के होटल में शिफ्ट हुए। मुख्य सरगना ने अपनी पत्नी और दोस्तों के साथ उद्योगपति की बिल्डिंग में किराए का घर दिलाया, ताकि उद्योगपति के मूवमेंट्स को मॉनिटर किया जा सके। एक दिन जब उद्योगपति अमेरिका की फ्लाइट पकड़ने के लिए बिल्डिंग से निकला, तो आरोपियों ने उसकी गाड़ी का पीछा किया, लेकिन मुंबई के व्यस्त ट्रैफिक की वजह से उद्योगपति तक आरोपी नहीं पहुंच पाए।
आरोपियों को यह पता नहीं था कि उद्योगपति अमेरिका से कब वापस आएगा। इसलिए वह कुछ दिनों के लिए यूपी शिफ्ट होना चाहते थे। वे उद्योगपति के अमेरिका से वापस लौटने के बाद उसके अपहरण की फिर कोशिश करते। लेकिन उससे पहले ही सीआईयू टीम की गिरफ्त में आ गए।





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