मुंबई, शिवसेनापक्षप्रमुख एवं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दशहरा सम्मेलन में केंद्र सरकार की नीतियों और महाराष्ट्र के प्रति उसके रवैये को लेकर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता के नशे में चूर कुछ दलों द्वारा बदले की भावना से केंद्रीय एजंसियों के मार्फत छापेमारी करवाकर परेशान किया जा रहा है। हमारी पुलिस को बदनाम किया जा रहा है जबकि भाजपा शासित राज्यों में ही पुलिस द्वारा नागरिकों पर अन्याय किया जा रहा है। बेगुनाहों पर अत्याचार किया जा रहा है, वहां की चर्चा नहीं होती। महाराष्ट्र पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। २६/११ आतंकी हमले का सामना करते हुए ९ आतंकियों को मौत के घाट उतारे थे, इस दौरान कई अधिकारी और जवान शहीद भी हुए थे। ऐसी महाराष्ट्र पुलिस पर हमें गर्व है।
शिवसेना की तरफ से षण्मुखानंद सभागृह में आयोजित दशहरा सम्मेलन में शिवसेनापक्षप्रमुख एवं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उपस्थित शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि महाराष्ट्र को एक अलग नजर से देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में कुछ हुआ तो कहते हैं कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई। अगर महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई, तो उत्तर प्रदेश में क्या हुआ? २६/११ की याद में हम स्मृति दिवस पर उन सभी लोगों को याद करते हैं, जिनमें पुलिस भी शामिल है। ऐसे पुलिस को आप माफिया कहते हैं? हमारे महाराष्ट्र में कई ऐसे पुलिसवाले हैं, जो उसी तरह आतंकवाद से यहां लड़ रहे हैं, जैसे सीमा पर जवान लड़ते हैं और आप इन पर आरोप लगाते हैं?
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र में बैठे लोग आज ‘सत्ता के नशे’ में हैं। इस नशे में वो दूसरे के घरों को बर्बाद करने पर तुले हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारी पुलिस एक सेलिब्रिटी को पकड़कर ढोल नहीं पीटती है। हमारी पुलिस ने १५० करोड़ के नशीले पदार्थ पकड़े हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्या केवल महाराष्ट्र में ही ड्रग्स और एनडीपीएस एक्ट के तहत आनेवाले पदार्थ मिले हैं? गुजरात के पोर्ट में भी बड़ी संख्या में ड्रग्स मिले हैं। मुंद्रा पोर्ट पर बरामद हुई हेरोइन मामले की भी जांच होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि साकीनाका कांड के बाद राज्यपाल ने पत्र लिखा। साकीनाका में महिला के साथ जो घटना घटी, वह बहुत दुखद है। साकीनाका कांड के आरोपी को जल्द सजा दी जाएगी। राज्यपाल ने कहा कि दो दिनों का विधानसभा सत्र हो, मैंने राज्यपाल को विनम्रता से कहा कि प्रधानमंत्री से कहिए कि संसद का सत्र बुलाएं, वहीं पर देश में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर चर्चा की जाएगी।





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