मुंबई। महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र में घोटाला करके नेता किस तरह अपनी जेबें भर रहे हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पेश किया है पांच बार की शिवसेना सांसद भावना गवली ने। उन्होंने सहकारी क्षेत्र की अपनी ही चीनी मिल को दीवालिया घोषित कर उसे अपनी ही एक निजी कंपनी से खरीदवा लिया। यह सौदा करवाने के लिए जो बोर्ड गठित हुआ, उसकी अध्यक्ष भी वे खुद ही रहीं। जिस बैंक ने इस सौदे के लिए फंड मुहैया कराया, वह बैंक भी खुद उन्हीं का है। ये तथ्य प्रवर्तन निदेशालय द्वारा तैयार एक आरोपपत्र में सामने आए हैं।
सांसद भावना गवली के खिलाफ ईडी की चार्जशीट से भाजपा के आरोपों को मिला दम
इस मामले की एफआइआर भी खुद भावना गवली की तरफ से दर्ज कराई गई थी। पिछले साल अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यवतमाल-वाशिम क्षेत्र से शिवसेना सांसद भावना गवली के पांच ठिकानों पर छापेमारी की थी। उन पर यह छापेमारी भाजपा नेता किरीट सोमैया के इस आरोप के बाद हुई थी कि भावना ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से 100 करोड़ रुपये लेकर उनका गलत इस्तेमाल किया।
किरीट का आरोप था कि भावना गवली ने 55 करोड़ रुपये की एक सहकारी चीनी बहुत काम दाम पर खरीद ली। बता दें कि श्री बालाजी सहकारी पार्टिकल कारखाना लि. की स्थापना भावना गवली के पिता पुंडलीकराव गवली ने 1992 में की थी। इस कारखाने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय सहकार महामंडल से 29 करोड़ रुपए और राज्य सरकार से 14 करोड़ रुपए अनुदान लिया था।





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