मुंबईः दुनियाभर में मुंबई लोकल के नेटवर्क और लाखों की भीड़ को संभालने की क्षमता पर अचरज किया जाता है। जो भी मुंबई आता है, एक बार मुंबई की जीवन रेखा यानी लोकल ट्रेन का अनुभव जरूर लेना चाहता है। पिछले 169 सालों से लोकल ने मुंबई को बनाया है और बढ़ाया है। अब मुंबई में ऐसा और कुछ होने जा रहा है, जिससे शायद व्यापार उद्योग जगत में नई क्रांति आ जाए। मुंबई में मालगाड़ी लोकल चलाने की योजना बन रही है। इस बजट में फ्रेट ईएमयू की परियोजना पर काम करने के लिए ₹1500 करोड़ का आवंटन किया गया है। ईएमयू यानी इलेक्ट्रिकल मल्टिपल यूनिट (लोकल ट्रेन) मुंबई के अलावा देश के कुछ और शहरों में भी चलती है, लेकिन इसका अधिकतम उपयोग यहीं होता है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि देश की आर्थिक राजधानी को रफ्तार देने के लिए ईएमयू फ्रेट की योजना बनाई गई है।
रेलवे के सालाना खर्चों का लेखा-जोखा और योजनाओं का रेकॉर्ड रखने वाली पिंक बुक में फ्रेट ईएमयू के लिए राशि आवंटित करने का उल्लेख है। रेलवे मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार ₹200 करोड़ रुपये की पूंजी इस काम के लिए रखी गई है, जबकि ₹1300 करोड़ रुपये बजट के अतिरिक्त विकल्प से जुटाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट को सीधे दिल्ली से रेलवे बोर्ड द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है। हालांकि, योजना को शुरू करने के लिए एक हजार रुपये की टॉकन राशि दी गई है।
रेलवे की योजना के अनुसार, 25 फ्रेट लोकल ट्रेनें बनाने से शुरुआत की जाएगी। इसके डिजाइन और बनावट पर विचार विमर्श किया जा रहा है। प्रत्येक लोकल के लिए तकरीबन ₹60 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं। प्रत्येक ट्रेन में 16 कोच लगाने का अनुमान है। सामान्य लोकल ट्रेनें 12 या 15 डिब्बों की होती हैं, लेकिन फ्रेट लोकल इससे लंबी हो सकती है। लोकल ट्रेनों में हर 3 कोच का एक यूनिट बनता है, जबकि फ्रेट में एक यूनिट चार कोच का हो सकता है।
रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह की लोकल की संकल्पना तैयार हुई है, लेकिन वास्तव में इसे चलाने के लिए बहुत काम की जरूरत है। लोकल फ्रेट इसलिए भी क्रांतिकारी साबित हो सकती है, क्योंकि इसको चलाना आसान होगा। कोच को दौड़ाने के लिए हजारों हॉर्स पावर के इंजिन की जरूरत नहीं होगी। ट्रेनें लोकल की तरह दोनों दिशाओं में चलेंगी। इनके कोच मुंबई लोकल में लगे सामान कक्ष जैसे हो सकते हैं। मुंबई में भीड़ वाले समय में एक लोकल ट्रेन में 4200-4500 लोग सवार होते हैं। ऐसे में फ्रेट लोकल के मालवहन क्षमता पर भी कोई सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता।
मुंबई में डिब्बावालों, सब्जी वालों, मछली वालों के सामान ढोने के लिए लोकल ट्रेनों का लगेज डिब्बा बहुत मशहूर है। एक अधिकारी ने बताया कि लगेज डिब्बों की अहमियत से ही फ्रेट लोकल की कहानी जुड़ी हुई है। इसके अलावा मॉनसून में ट्रैक के किनारे पड़े कीचड़ और कचरे को उठाने के लिए कचरा स्पेशल ट्रेनें चलती हैं, जिसे बाद में स्वच्छता रथ का नाम दिया गया। इन दोनों चीजों को देखते हुए मुंबई में फ्रेट लोकल चलाने की भी योजना बनाई गई है। इन्हें मुंबई से पुणे या मुंबई से सूरत तक भी चलाया जा सकता है।





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