मुंबई: राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के दोनों बेटों को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने समन जारी किया है। कोर्ट ने देशमुख, उनके दोनों बेटों ऋषिकेश और साहिल के अलावा मामले में अन्य लोगों को 5 अप्रैल को अपने समक्ष पेश होने का आदेश जारी किया है। स्पेशल पीएमएलए कोर्ट के जज आर.एन. रोकडे ने पिछली सुनवाई के दौरान देशमुख और उनके बेटों के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ ईडी की ओर से दायर चार्जशीट का संज्ञान लिया था। इस दौरान कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया की शुरू की थी। उसे आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को कोर्ट ने मामले के आरोपियों को अपने समक्ष 5 अप्रैल को पेश होने का निर्देश दिया।
ईडी के अनुसार, देशमुख ने राज्य के गृह मंत्री के रूप में अपने अधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वझे के जरिए मुंबई के विभिन्न बार और रेस्तरां से करोड़ों रुपये लिए हैं। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि नागपुर स्थित श्री साईं एजुकेशन ट्रस्ट के माध्यम से पैसे की हेराफेरी की गई और यह ट्रस्ट देशमुख के परिवार द्वारा संचालित किया जाता है।
राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के ओएसडी रवि व्हटकर ने ईडी को दिए बयान में कहा है कि ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए पुलिस इंस्पेक्टरों के नाम को अंतिम रूप देने के सिलसिले में अनिल देशमुख, पर्यावरण मंत्री अनिल परब और संबंधित पुलिस आयुक्त निजी और गोपनीय मीटिंग करते थे। इन मींटिंग्स का कोई रेकॉर्ड नहीं रखा जाता था। मनी लॉन्ड्रिंग केस में अनिल देशमुख के खिलाफ दायर चार्जशीट में ईडी ने कई लोगों को गवाह बनाया है। इनमें रवि व्हटकर भी हैं। व्हटकर ने ईडी को बताया है कि पुलिस इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के ट्रांसफर की सूची तैयार करना उनके काम में शामिल था। उनका दावा है कि अनिल परब खुद धनेश्वरी, सह्याद्री या मंत्रालय में देशमुख से मिलते थे और अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के संबंध में शिवसेना की सिफारिशों की सूची के बारे में उनसे बात करते थे।
जब ईडी ने महाराष्ट्र में पुलिस अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट तैयार करने में उनकी भूमिका के बारे में व्हटकर से पूछताछ की, तो उन्होंने कहा, ‘पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को पुलिस अफसरों के ट्रांसफर के लिए महाराष्ट्र के मंत्रियों, विधायकों, एमएलसी और पार्टी प्रतिनिधियों से कई सिफारिशें मिलती थीं। उन सिफारिशों को छांटने और सूचीबद्ध करने का काम देशमुख ने मुझे सौंप रखा था।’ उन्होंने कहा, ‘देशमुख के निर्देश पर मैं उनके पुलिस ट्रांसफर से जुड़े मौखिक आदेश को पुलिस आस्थापना बोर्ड (PEB) को यह कहकर भेजते थे कि इन सिफारिशों पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाए।





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