मुंबई : महाराष्ट्र में शासन कर रहे तीन-पार्टियों वाली गैर-बीजेपी गठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि आने वाले दिनों में इसे कई तरह की चुनौतियां का सामना करना पड़ सकता है. महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के सामने मौजूद चुनौतियों में विधानसभा स्पीकर के चुनाव का मामला भी शामिल है, जिससे गठबंधन की एकता का पता चल सकता है. दूसरी ओर, गठबंधन की साथी कांग्रेस पार्टी के नेता इस खबर को लेकर चिंतित हैं कि उनके कुछ विधायकों को बीजेपी अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है.
आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में नगर निगमों के चुनाव होने वाले हैं, जिनमें मुंबई भी शामिल है. इन चुनावों में एमवीए को बीजेपी की ओर से कड़ी चुनौतियां मिलना निश्चित है. गठबंधन की एक दूसरी साथी शिवसेना को भी उसके प्रमुख नेता संजय राउत के खिलाफ बीजेपी की ओर से भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण तगड़ा झटका लगा है.
इन तमाम चुनौतियों के बीच, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, जो सर्जरी की वजह से काफी दिनों बाद काम पर लौटे हैं, 20 फरवरी को मुंबई में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से मुलाकात करने वाले हैं. इस मुलाकात के दौरान 2014 के आम चुनाव में बीजेपी का सामना करने के लिए स्थानीय पार्टियों का एक मोर्चा बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी. बिना कांग्रेस के बने इस मोर्चे के प्रस्ताव से भी इस बात का पता चलेगा कि एमवीए के भीतर कितनी एकता है.
बुधवार को कांग्रेस के सीनियर लीडर सुशील कुमार शिंदे और एमएम पल्लम राजू ने पार्टी विधायकों के साथ बैठक की. इस दौरान विधायकों को निर्देश दिया गया कि पार्टी उम्मीदवार की जीत पक्की करने के लिए हर प्रकार के दबाव और प्रलोभनों से दूर रहना है. करीब दर्जन भर एमवीए नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की नजर और बीजेपी और एमवीए के नेताओं द्वारा एक दूसरे लगाए जा रहे आरोपों के मद्देनजर, कांग्रेस को डर है कि स्पीकर चुनाव में क्रॉस वोटिंग हो सकती है.





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