मुंबई, सत्र अदालत ने कथित जालसाजी और धोखाधड़ी के एक मामले में महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दारेकर की अग्रिम जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। भाजपा नेता दारेकर पर एक श्रमिक समाज का सदस्य बनने के लिए दस्तावेजों में जालसाजी करने और बाद में श्रमिक कोटे में मुंबई जिला सहकारी समिति का चुनाव लड़ने का आरोप है। एफआईआर के अनुसार, उन्होंने प्रतिज्ञा श्रम सहकारी समिति का सदस्य बनने के लिए कुछ जाली दस्तावेज बनाए।
अदालत ने शुक्रवार को दारेकर की गिरफ्तारी से पहले की जमानत खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत हैं और आगे की जांच जरूरी है। न्यायाधीश आरएन रोकाडे ने हालांकि, पहले दारेकर को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को 29 मार्च तक बढ़ा दिया ताकि वह हाई कोर्ट में अपील दायर कर सकें। आम आदमी पार्टी के नेता धनंजय शिंदे की शिकायत के बाद आईपीसी के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिंदे ने आरोप लगाया कि दारेकर ने मुंबई जिला सहकारी समिति के निदेशक पद के लिए श्रमिक वर्ग के तहत चुनाव लड़ा था। दारेकर ने कई वर्षों तक बैंक के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। शिकायत के अनुसार, 1997 में उन्होंने प्रतिष्ठा श्रम सहकारी समिति के साथ एक मजदूर के रूप में खुद को पंजीकृत कराया, जिससे वह धोखे से श्रमिक वर्ग के तहत बैंक चुनाव लड़ने में सक्षम हो गए।





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