मुंबई, भारतीय रेलवे में साल के बारहों महीने कन्फर्म टिकट की मारा-मारी रहती है। इसके पीछे की वजह अब पाकिस्तानी ‘सॉफ्टवेयर’ डेवलपर्स भी जान गए हैं। इसका फायदा टिकट दलाल उठाते हैं। दलालों का मकसद यात्रियों को कन्फर्म सीट देना होता है और इसके एवज में दलाल मोटी कमाई करते हैं। इस बात की जानकारी पाकिस्तान के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को हो गई है। ऐसे में ये पाकिस्तानी सॉफ्टवेयर डेवलप कर इंडिया में रेल टिकट की हार्डकोर’ जालसाजी करवा रहे हैं। ये खुलासा पश्चिम रेलवे आरपीएफ में पिछले महीने दलालों की गिरफ्तारी के बाद हुई जांच से हुआ है।
बता दें कि आरपीएफ की जांच में ये खुलासा हुआ है कि दुश्मन देश के सॉफ्टवेयर से कन्फर्म टिकट निकालकर टिकट दलाल ‘हार्डकोर’ जालसाजी कर रहे हैं। टिकट बुकिंग काउंटर पर २४ घंटे से अधिक समय तक लाइन में खड़े होकर कन्फर्म टिकट पाने की आस में यात्री तब मायूस हो जाते हैं, जब उन्हें पता चलता है कि कन्फर्म टिकट नहीं मिला।
पश्चिम रेलवे आरपीएफ सूत्रों के मुताबिक पिछले महीने पकड़े गए रेल टिकट दलालों से पूछताछ के दौरान पता चला है कि हिंदुस्थान में अवैध सॉफ्टवेयर कारोबार को आगे बढ़ाने में ‘रशियन सॉफ्टवेयर डेवलपर्स’ और ‘पाकिस्तानी सॉफ्टवेयर डेवलपर्स’ का हाथ है। दलाल इनसे अपनी जरूरत के हिसाब से सॉफ्टवेयर बनवाते हैं और क्रिप्टो करेंसी में पैसे का लेनदेन धड़ल्ले से हो रहा है। इन पाकिस्तानी सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की नजरें हर साल करीब ३०० करोड़ रुपए से अधिक के रेल टिकटों के कारोबार पर है।
अवैध सॉफ्टवेयर आईआरसीटीसी के ब्लॉग इन वैâप्चा और सबमिट कैप्चा को बायपास करते हुए सीधे आईआरसीटीसी की टिकट बुकिंग पेज पर पहुंचकर झटपट टिकट बुक करा लेता है। यानी अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए ओसीआर से नॉर्मल कैप्चा रीड कर बायपास कर लेता है, जबकि आम यात्री को ये दोनों कैप्चा डालने में समय लग जाता है। वहीं जब टिकट के भुगतान के लिए ओटीपी डालने की बारी आती है तो दलाल इलीगल सिस्टम ओटीपी को सिंक्रोनाइज कर ऑटो फीड कर लेता है। ऐसे में ओटीपी डालने की जरूरत नहीं पड़ती है और वो काउंटर पर खड़े यात्री के हाथों से टिकट छीनकर पहले ही दूसरे के लिए टिकट बुक कर लेता है।





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