मुंबई, महाराष्ट्र में ईडी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद से ही अंधेर मचा हुआ है। सरकार में बैठे मंत्री से लेकर संत्री सभी अपने मनमुताबिक काम कर रहे हैं। इससे सभी विभागों में कामकाज राम भरोसे चल रहा है। सबसे दयनीय स्थिति स्वास्थ्य विभाग की बनी हुई है। राज्य में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का नतीजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। इससे सबसे अधिक ३० साल से अधिक आयु की महिलाएं प्रभावित हो रही हैं। आलम यह है कि महिलाओं का विभिन्न कारणों से न केवल स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, बल्कि वे हाइपरटेंशन और डायबिटीज की शिकार भी हो रही हैं। यह जानकारी की गई हेल्थ स्क्रीनिंग में सामने आई है। इसमें यह भी पता चला है कि दोनों बीमारियों का खतरा पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक है।
महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित स्क्रीनिंग से पता चला है कि पुरुषों की तुलना में ३० वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में उच्च रक्तचाप और मधुमेह का प्रसार अधिक है। इसके मुख्य कारक मोटापा, घरेलू हिंसा, आलस्य, तंबाकू और शराब का सेवन जैसे और कई अन्य कारक हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक-आर्थिक बाधाएं पुरुषों की तुलना में महिलाओं को असंगत रूप से प्रभावित करती हैं।
५० के बाद समान आयु के पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हाइपरटेंशन होने की संभावना अधिक होती है। महिलाओं में इसके जोखिम से जुड़े विशिष्ट आनुवांशिक लक्षण पुरुषों की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक हैंै। गर्भावस्था से संबंधित जटिलताएं खतरे को बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं। इसके साथ ही गर्भ निरोधक गोलियां और रजोनिवृत्ति उच्च रक्तचाप और हृदय रोग इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
एमडी मेडिसिन डॉ. नेताजी मुलिक का कहना है कि इन बीमारियों के बारे में खासकर महिलाओं में अभी भी जागरूकता की कमी है। इलाज करानेवाली अधिकांश महिलाओं में मधुमेह का पता देरी से चलने के कारण गंभीर दुष्प्रभावों का अनुभव करती हैं। घरेलू जिम्मेदारियों, फील्ड वर्क और जागरूकता की कमी के कारण वे इन लक्षणों को नजरअंदाज करती रहती हैं, जो आगे चलकर उनके लिए कई दिक्कतें पैदा कर देता है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, रजोनिवृत्ति की उम्र, हिस्टेरेक्टॉमी का इतिहास, पहली बार बच्चे के जन्म के समय महिला की उम्र, घरेलू हिंसा और गंभीर भावनात्मक हिंसा महिलाओं में हाइपरटेंशन के प्रमुख कारक हैं। इसकी शिकार महिलाओं की संख्या बहुत अधिक नहीं है, लेकिन बढ़ सकती है, क्योंकि ४० से अधिक आयु वर्ग में दोनों बीमारियों की व्यापकता दिखाई देती है। यह संभव हो सकता है कि अब तक जिन लोगों की जांच की गई है, वे युवा वर्ग के हों। फिलहाल, स्क्रीनिंग अभी भी जारी है। अभियान पूरा करने के बाद स्पष्ट तस्वीर मिल सकती है।





Users Today : 34
Users Yesterday : 18
Users Last 7 days : 377
Users Last 30 days : 866
Users This Month : 324
Users This Year : 9274
Total Users : 70481
Views Today : 43
Views Yesterday : 29
Views Last 7 days : 519
Views Last 30 days : 1123
Views This Month : 446
Views This Year : 10483
Total views : 106506
Who's Online : 0


