मुंबई, मुंबई के बढ़ते दमघोंटु प्रदूषण से परेशान मुंबई के एक वकील ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका और (एमपीसीबी) महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कानूनी नोटिस जारी कर मनपा को शहरभर में एयर प्यूरिफायर लगाने के अपने वादे को पूरा करने की याद दिलाई है। वकील सैफ आलम ने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी नोटिस नागरिक निकाय को कार्रवाई के लिए प्रेरित करने के लिए एक अनिवार्य याचिका के रूप में कार्य करता है, क्योंकि शहर भर में हवा की गुणवत्ता गिर रही है।
एडवोकेट आलम ने संवाददाता से कहा, ‘यह सिर्फ अक्टूबर है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, हवा की गुणवत्ता और भी खराब होने लगेगी। चिंता की बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में हमने दिल्ली के एक्यूआई को भी पीछे छोड़ दिया है। अब इससे पहले कि हालात और भी बदतर हो जाए, तो वक्त आ गया है कि मनपा एक्शन ले।’ वह कहते हैं कि यदि एयर प्यूरिफायर नहीं, तो बीएमसी और एमपीसीबी को प्राथमिकता के आधार पर एक विशेषज्ञ समिति बनानी चाहिए और वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान पेश करना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, माह की शुरुआत से ही हवा की गुणवत्ता खतरनाक रही है। मुंबई में फिलहाल, हवा में सांद्रता पीएम २.५ है, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित सीमा से ५.२ गुना अधिक है। मुंबई में वायु प्रदूषण की वजह से १ जनवरी २०२१ से अब तक लगभग १४,००० लोगों की मौत हुई है, जिसके चलते शहर की अर्थव्यवस्था को लगभग साढ़े सत्रह करोड़ का नुकसान हुआ है। पिछले एक हफ्ते से मुंबई के कई हिस्सों में एक्यूआई २०० से अधिक है।
मनपा ने बजट के दौरान शहर में एयर प्यूरिफायर लगाने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ साउथ मुंबई में कुछ इंस्टॉल किए गए हैं। मुंबई का मतलब सिर्फ, साउथ मुंबई है? उपनगर भी हैं न, मैं ट्रॉम्बे में रहता हूं। वहां के हालात बहुत बुरे हैं। मैं पर्टुसिस (काली खांसी) का मरीज हूं और उनकी स्थिति को भी समझता हूं, जो सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं, यह बच्चों के लिए भी बहुत खतरनाक है। आलम कहते हैं कि महानगर में अंधाधुंध निर्माण कार्य चाहे वह बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन हो या फिर बड़ी-बड़ी सरकारी परियोजनाएं, जैसे कि कोस्टल प्रोजेक्ट, मेट्रो प्रोजेक्ट्स आदि का डस्ट पार्टिकल वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, जो बहुत ही खतरनाक है।
मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने इस साल फरवरी में अपने बजट भाषण के दौरान शहर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक विस्तृत योजना की घोषणा की थी। वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए २५ करोड़ रुपए भी आवंटित किए थे। तत्काल उपाय के रूप में, बीएमसी ने धूल को कम करने के लिए फुटपाथों और सड़कों पर पानी छिड़कने का निर्णय लिया था। धूल की सफाई के लिए ई-पावर स्वीपर, सड़कों और फुटपाथों पर धूल पैâलने से रोकने के लिए स्प्रिंकलर जैसे कई उपकरणों का जिक्र किया गया था। मनपा ने शहर के पांच भीड़भाड़ वाले स्थानों पर एयर प्यूरीफायर लगाने का भी पैâसला किया था। इनमें से कोई भी उपाय शहर में पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है, जिसका असर मुंबई के निर्दोष लोगों पर हो रहा है।





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