Home Maharashtra ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा, कोरोना के बाद मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी

ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा, कोरोना के बाद मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी

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मुंबई, ऑस्टियोपोरोसिस नामक हड्डियों से जुड़ी परेशानी युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इसे लेकर न केवल सावधानी बरतने की जरूरत है, बल्कि इस बीमारी के बारे में जागरूकता पैदा की जानी चाहिए।
ज्ञात हो कि ऑस्टियोपोरोसिस हड्डी से संबंधित समस्या है। इसमें हड्डियों की ताकत कम हो जाती है। बीमारी की चपेट में आनेवाले मरीजों को हल्की चोट अथवा मामूली झटका भी लगने पर फ्रैक्चर हो जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ ही हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक होता है। इसे लेकर किए गए विश्वलेषण से पता चला है कि युवावस्था में गलत जीवनशैली इस बीमारी का कारण है।
यह समस्या खासकर वृद्धावस्था में दिखाई देती है। कमर की हड्डियां, कूल्हे की हड्डियां ऑस्टियोपोरोसिस से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। रोग के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन इससे पीठ के निचले हिस्से और गर्दन में दर्द होने लगता है। सर्दियों में हड्डियों का दर्द बढ़ जाता है।
वर्तमान समय में कूल्हे से जुडी एवैस्कुलर नेक्रोसिस नामक बीमारी लगातार युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। एक वक्त था, जब इस बीमारी का असर ५० या उससे अधिक उम्र को पार कर चुके लोगों में दिखता था, लेकिन कोरोना के बाद ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। सबसे हैरान करनेवाली बात यह है कि अब २५ से ३० साल के मरीज भी कूल्हे की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों की सलाह के बिना कोई भी दवाई लेने से भी कुल्हे में समस्या हो सकती है।
चिकित्सकों ने बताया कूल्हे में उत्पन्न हो रही समस्या के कई कारण हो सकते हैं। इसमें लंबे समय तक स्टेरॉयड का सेवन और अल्कोहल की अत्यधिक मात्रा भी एक महत्वपूर्ण कारण है। इसके अलावा कुछ ऐसी मेटाबॉलिक डिजीज हैं, जिनमें मरीज के एवैस्कुलर नेक्रोसिस का कारण मुख्यत: रहता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, जिस स्टेज में मरीज अस्पताल में आते हैं, उसमें अधिकतर कूल्हा बदलने का ऑपरेशन करना होता है। ऐसे में मरीज थोड़ी सी जागरूकता दिखाएं तो समय रहते ही मरीज का कूल्हा बदलने से बचाया जा सकता है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरज महांगड़े का कहना है कि इसका मुख्य उपाय पोषण आहार है। आहार में हरी सब्जियां, दूध, फल, अंडे, मछली को शामिल करना चाहिए। इससे हड्डियां कुछ हद तक मजबूत होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्टेरॉयड के अति प्रयोग से महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बढ़ रहे हैं। तनाव और इसके चलते हार्मोनल असंतुलन से हड्डियों का नुकसान या ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। सूरज की रोशनी के साथ ही विटामिन डी३ और वैâल्शियम की कमी से हड्डियों को नुकसान हो सकता है। मौजूदा समय में अगर १० मरीज उनके पास आते हैं, तो उनमें से २ से ३ मरीजों में विटामिन-डी और सी की कमी है।