मुंबई: महाराष्ट्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल का असर पहले दिन देखने को मिला। मरीजों को नंबर काफी देरी से आ रहा था। हालांकि वरिष्ठ डॉक्टरों ने ओपीडी में मोर्चा संभाला था, लेकिन संख्या बल कम होने से पूरा लोड टीचिंग फैकल्टी पर था। महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड) गुरुवार शाम 5 बजे से ही हड़ताल पर हैं। स्टाइपेंड में वृद्धि, समय पर स्टाइपेंड मिलने और हॉस्टल की संख्या बढ़ाने की मांग रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा सरकार से की जा रही है, लेकिन सरकार से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है। शुक्रवार को हड़ताल का थोड़ा असर ओपीडी पर देखने को मिला। पैर में चोट लगने के बाद इलाज के अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे राजू पाल को डॉक्टरों ने अटेंड तो किया, लेकिन उन्हें काफी समय लग गया।
पाल ने बताया कि मैं लकड़बाजार में काम करता हूं काम करते वक्त मेरे पैर में चोट आई। जब अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने देखा, एक्सरे निकलवाया और कच्चा प्लास्टर भी लगाया, लेकिन इस प्रक्रिया में 3 घंटे निकल गए। सीएसटी के निवासी सुधीर सिंह ने बताया कि मुझे बुखार आ रहा है। मुझे पता नहीं था कि डॉक्टरों की हड़ताल है। मेरा नंबर आने को एक घंटे लग गए। सिर में दर्द की शिकायत लेकर भिवंडी से आई फिरदोज कुरेशी ने बताया कि मैं न्यूरोलॉजी के डॉक्टर को दिखाने आई थी। डॉक्टरों ने चेक किया लेकिन यहां आ कर 3 घंटे हो चुके अब दवा लेकर घर जाऊंगी। एनबीटी ने वार्ड में भर्ती अनेक मरीजों से बात की।
रेजिडेंट डॉक्टरों से हमने अनुरोध किया था कि वे हड़ताल पर न जाए उनकी मांगे पूरी की जाएंगी। पिछले कैबिनेट के बैठक में मराठा आरक्षण पर ही चर्चा हुई इसके अलावा अन्य किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं हुआ। 25 फरवरी को होने वाली बैठक में इनकी समस्या का निवारण कर दिया जाएगा। स्टाइपेंड में वृद्धि की जाएगी और हॉस्टल की मर्रमात और आनेवाले समय में नए हॉस्टल भी बनाए जाएंगे।
वार्ड में भर्ती मरीजों के अनुसार डॉक्टर ने सुबह राउंड लेकर स्वास्थ्य का जायजा लिया। उसके बाद जरूरत पड़ने पर डॉक्टर्स आ भी रहे हैं। इलाज में कोई बाधा नहीं आ रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक विभाग प्रमुख ने बताया कि कुछ ओपीडी में भिड़ थी तो कुछ में नहीं। जिन्हे स्ट्राइक के बारे में पता नहीं था वे लोग अस्पताल में आए। विभागप्रमुख, एसोसिएट प्रोफेसर, इंटर्न ने ओपीडी में आनेवाले मरीज को देखा। हां रेजिडेंट डॉक्टर्स न होने से डॉक्टरों की कमी के कारण सार बोझ दो से तीन डॉक्टरों पर था। मरीजों को थोड़ा इंतजार भी करना पड़ा। निवासी डॉक्टर इमरजेंसी वार्ड में तैनात दिखे जिससे आपातकाल में आने वाले लोगों को ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा।





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