मुंबई, रेलवे विभाग की ओर से बार-बार यह दावा किया जाता है कि यात्रियों की सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोर-कसर नहीं छोड़ी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रेलवे विभाग का उक्त दावा पूरी तरह से खोखला साबित हो रहा है। रेलवे स्टेशनों से लेकर
रेलवे ट्रैक तक यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यानी रेलवे विभाग यात्रियों की छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करने में असफल साबित हो रही है। सबसे आश्चचर्य की बात यह है कि रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा तक को भी रेलवे की ओर से नजरअंदाज किया जाता है। जिसका जीता-जागता प्रमाण मुंबई में माहिम रेलवे स्टेशन है। माहिम स्टेशन का घाट बन गया है, जहां रोज कपड़े-धोए और सुखाए जाते हैं। इसके साथ ही रेल पटरियों पर बेखौफ नहाने और शौच करने वालों की तादाद में इजाफा हुआ है। माहिम-माटुंगा के बीच रेलवे ट्रैक के किनारों पर गंदगियों का अंबार लगा है, क्योंकि रेलवे ट्रैक के बगल ही कचरा डंप किया जाता है। ट्रैक के किनारे डंप किया हुआ कचरा हवा में इधर-उधर फैलता है। माहिम स्टेशन पर हार्बर लाइन की पटरियों के किनारे पटरियों पर कपड़े सुखाए जाते हैं। इसके अलावा ट्रैक पर ही नहाने-धोने का भी काम किया जाता है। यहां जिस ट्रैक पर कपड़े सुखाए जाते हैं। उसी के बगल से हार्बर जाने वाली लोकल ट्रेनों का आना-जाना लगा रहता है। इन सभी को देखकर तो यही लगता है कि जल्द ही पटरियों पर लोग झुग्गी-झोपड़ियां भी बसाना शुरू कर देंगे। अब ऐसे में सवाल यह है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद रेलवे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह क्यों मोड़ रही है।
वेस्टर्न रेलवे के अधिकारी से जब ट्रैक पर लोगों के कपड़े सुखाने व नहाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो लाइफ ट्रैक नहीं है। हालांकि, आरपीएफ द्वारा बीच-बीच में ऐसे लोगों पर एक्शन लिया जाता है। अधिकारी ने ट्रैक के बगल कचरों के अंबार को लेकर कहा कि रेलवे कचरों की सफाई के लिए ड्राइव करवाती रहती है।





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