मुंबई: महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर है. नासिक, ठाणे, हिंगोली, मुंबई दक्षिण समेत राज्य की 13 सीटों पर शिवसेना और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के बीच सीधी टक्कर है. वहीं एनसीपी और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) गुट के उम्मीदवार दो सीटों पर आमने-सामने हैं.
शिवसेना और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) अपने मूल पार्टियों को कई सीटों पर कड़ी टक्कर दे रही हैं, जिसने महाराष्ट्र में मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
शिवसेना बनाम शिवसेना
मौजूदा आम चुनाव में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना जिन 15 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उनमें से 13 सीटों पर पार्टी को उनके प्रतिद्वंद्वी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से सीधी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है.
जून 2022 में उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व करने के बाद, शिंदे शिवसेना का विभाजन करने में कामयाब रहे. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को विधानसभा अध्यक्ष नेा “असली शिवसेना” घोषित किया जिसके बाद शिंदे की स्थिती राज्य में और मजबूत हो गई.
हालांकि, राजनीतिक जानकारों की मानें तो शिंदे के नेतृत्व वाली सेना के लिए असली परीक्षा लोकसभा चुनाव के नतीजे होंगे जो यह तय करेगा की क्या ठाणे के दिग्गज नेता शिवसेना के मतदाताओं और कैडर का समर्थन हासिल करने में भी कामयाब रहे हैं या नहीं.
महायुति के सीट बंटवारे में, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 48 लोकसभा सीटों में से 15 सीटें अपने नाम करके यह साबित कर दिया की वह एक अच्छे सौदेबाज हैं. रामटेक और कोल्हापुर को छोड़कर इन 15 सीटों में से अन्य सभी सीटों पर दो सेनाओं के बीच सीधा मुकाबला है. बहरहाल, शिंदे गुट के लिए चुनाव में स्थिती बेहद नाजुक है. पार्टी में चल रहे अंतर्कलह के अलावा उनके पास उद्धव ठाकरे के तरफ बह रही सहानुभूति लहर से लड़ने की भी चुनौती है. और इन्हीं दो फेक्टर पर उद्धव ठाकरे गुट चुनाव में अपनी बढ़त बना सकता है.





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