अमरावती : इंसानों और जानवरों के संघर्ष के बीच ही अमरावती जिले की दो किसान बहनों ने भूख हड़ताल पर जाने की धमकी दी है. ये दोनों बहनें वारुद तहसील में आने वाले पुसला गांव की रहने वाली हैं. दोनों पिछले काफी समय से फसलों के नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे को हासिल करने के लड़ रही हैं. ये दोनों बहने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से उनका हक देने की मांग उठा रही हैं. इनका कहना है कि अगर अधिकारियों ने उनकी आवाज नहीं सुनी तो फिर ये दोनों भूख हड़ताल पर जाएंगी.
जंगली सुअरों और नीलगाय से नुकसान
अमरावती जिले में इस समय बिडकर बहनों, बेबी और सुशीला की ही चर्चा है. दोनों ने धमकी दी है कि अगर उन्हें मुआवजे के 63000 रुपये नहीं मिले तो फिर वो भूख हड़ताल पर जाएंगी. पिछले साल गवाहों की मौजूदगी में मौके पर पंचनामा करने के बाद वन कर्मचारियों की तरफ से ही मुआवजा देने का फैसला किया गया था. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार पंचनामा पर जो मुआवजा मिलना था उसकी रकम के साथ छेड़छाड़ की गई है. दोनों बहनों ने 17 अक्टूबर 2023 को दावा किया था कि जंगली सुअरों और नीलगायों ने उनकी तूर, अरंडी, कपास और संतरे की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया था.
पंचनामा में छेड़छाड़ का आरोप
बिडकर बहनों के पास पंढेरी में खेती योग्य पैतृक जमीन है. बहनों का कहना है कि उन्होंने वन विभाग के पास शिकायत दर्ज कराई है जिसमें फील्ड स्टाफ के अलावा कुछ और लोगों के नाम हैं जिन्होंने पंचनामा किया था. उनकी फसलों के नुकसान को जो अनुमान लगाया गया था वह करीब 63000 रुपये था. 22 मार्च 2024 को पांच महीने बाद उन्हें रकम तो मिली लेकिन सिर्फ 21000 रुपये ही उनके बैंक अकाउंट में आए. अब इन बहनों का कहना है कि ओरिजनल पंचनामे के साथ छेड़छाड़ की गई है जिससे उन्हें पूरी रकम नहीं मिली है.
बाकी बची रकम के लिए प्रदर्शन
इन दोनों बहनों की मानें तो उन्हें जीवनयापन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनकी फसल जंगली जानवरों ने चौपट कर दी थी. बिडकर बहनें अथॉरिटीज से निराश हैं कि उन्होंने पूरा मुआवजा देने में आनाकानी की. ऐसे में उन्हें अब भूख हड़ताल से ही एक रास्ता नजर आ रहा है. उन्हें उम्मीद है कि उनका विरोध प्रदर्शन हायर अथॉरिटीज का ध्यान इस मसले की तरफ आकर्षित करेगा और उन्हें मुआवजे की बाकी बची हुई रकम मिल सकेगी.
इस घटना ने किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाकर रख दिया है, खासकर उन किसानों के सामने जिनके खेत जंगल के पास स्थित हैं. जंगली जानवरों की तरफ से फसल को नुकसान पहुंचाना ऐसे क्षेत्रों में एक बहुत ही आम समस्या है.





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