मुंबई : महाराष्ट्र में भले ही स्कूल शुरू हुए एक महीना हो गया हो, लेकिन कक्षा १ से ८वीं तक के ३७ लाख विद्यार्थी अभी भी ‘समग्र शिक्षा अभियान’ और राज्य सरकार की ‘मुफ्त गणवेश योजना’ के तहत यूनिफॉर्म का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से गरीब और जरूरतमंद छात्रों और उनके अभिभावकों में शिंदे सरकार के प्रति नाराजगी नजर आ रही है। यही नहीं इस वर्ष राज्य में स्वतंत्रता दिवस भी बिना यूनिफॉर्म के मनाया जाएगा क्या, इस तरह का डर विद्यार्थियों को सता रहा है।
राज्य सरकार द्वारा जिला परिषद एवं नगरपालिका के प्राथमिक स्कूलों के विद्यार्थियों को दो पोशाक, एक जूता एवं दो मोजे उपलब्ध कराने की घोषणा के बाद गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को देने की घोषणा की गई थी, लेकिन स्कूल शुरू होने के एक महीने बाद भी नासिक, जलगांव, परभणी, रत्नागिरी सहित अन्य जिलों में अधिकांश विद्यार्थियों को अभी तक ये यूनिफार्म नहीं मिले हैं। इसलिए हजारों छात्र पुराने यूनिफॉर्म पहनकर ही स्कूल जाने को मजबूर हैं। राज्य में शिंदे सरकार की चर्चा अब लोग ‘नारे वाली सरकार’ के रूप में कर रहे हैं।
शैक्षणिक वर्ष सन २०२४-२५ में संबंधित संगठन को माइक्रो-कटिंग द्वारा छात्रों के वर्दी के कपड़े की आपूर्ति करनी है। इसके बाद महिला स्वयं सहायता समूह के कारीगर छात्र-छात्राओं का माप लेंगे और उन्हें सिलेंगे, लेकिन बताया जा रहा है कि माप उपलब्ध नहीं होने के कारण गणवेश उपलब्ध नहीं हो पा रही है।




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