मुंबई: भारत में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं महामारी का रूप ले चुकी हैं। आलम यह है कि छात्रों की आत्महत्या की दर समग्र आत्महत्या प्रवृत्तियों की दर से भी अधिक है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर, छात्र आत्महत्या भरत में फैलती महामारी रिपोर्ट वार्षिक आईसी-3 सम्मेलन में जारी की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां आत्महत्या की घटनाओं की संख्या में प्रतिवर्ष दो प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि छात्र आत्महत्या के मामलों की कम रिपोर्टिंग होने की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक में 0-24 वर्ष की आयु के बच्चों की जनसंख्या 58.2 करोड़ से घटकर 58.1 करोड़ हो गई, जबकि छात्र आत्महत्याओं की संख्या 6,654 से बढ़कर 13,044 हो गई। आईसी3 संस्थान एक स्वयंसेवी आधारित संगठन है, जो दुनिया भर के उच्च विद्यालयों को उनके प्रशासकों, शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण संसाधनों के माध्यम से सहायता प्रदान करता है ताकि मजबूत करियर और कॉलेज परामर्श विभागों की स्थापना और रखरखाव में मदद मिल सके।





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