मुंबई : महाराष्ट्र में निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चा तेज हो गई है. 2024 का विधानसभा चुनाव भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर लड़ा था. परिणामस्वरूप, आज तीनों पार्टियां सत्ता में हैं। इस बीच, तीनों दलों के एक साथ आने से महागठबंधन के भीतर विभिन्न कारणों से रस्साकशी की स्थिति बनी हुई है. मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान भी इसी तरह की जद्दोजहद देखने को मिली थी. दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही पार्टियों में मंत्री पद को भरने की होड़ मची हुई थी. इस बीच उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़ा बयान दिया है.
अजित पवार शनिवार को हिंगोली पहुंचे थे, जहां, उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट विस्तार को लेकर अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि मैंने वादा किया है कि मैं ढाई साल में नए लोगों को मंत्री पद दूंगा. मैं अपना वादा निभाऊंगा. इसलिए चिंता न करें. अजित पवार के इस बयान के बाद से एक बार फिर से महाराष्ट्र में ढाई साल के फॉर्मूले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, माना यह भी जा रहा है कि अजित अपनी पार्टी और अपने नेताओं के लिए ऐसा बोल रहे थे.
दरअसल, 2024 के विधानसभा चुनाव में जब राज्य में गठबंधन की सरकार बनने वाली थी तब भी ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले की चर्चा बहुत ज्यादा दी. चुनाव परिणाम आने के बाद कई दिनों तक नेताओं के बीच में मंथन होता रहा. हालांकि, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी थी इसलिए मुख्यमंत्री पद उसे मिला और देवेंद्र फडणवीस सीएम बने. अंततः आम सहमति बनने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा की गई। इस बार अजित पवार की पार्टी ने मंत्री पद देते हुए ढाई-ढाई साल का खास फॉर्मूला तय किया था.
वास्तव में क्या निर्णय लिया गया?
उस समय यह निर्णय लिया गया था कि जिन नेताओं को फिलहाल मंत्री पद दिया गया है, उन्हें अगले ढाई साल बाद पद छोड़ना होगा. यानी नए नेता को अगले ढाई साल बाद मंत्री बनने का मौका देने का फार्मूला सामने रखा गया. इसी फार्मूले का जिक्र हाल ही में अजित पवार ने हिंगोली में किया है. अजित पवार ने कहा है कि उन्होंने कहा था कि वे नए लोगों को मंत्री बनने का मौका देंगे और वे अपना वादा निभाएंगे.
नए मंत्री पद की कुर्सी किसे मिलेगी?
अजित पवार के इस बयान के बाद अब तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. फडणवीस सरकार का ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद उनके मंत्रिमंडल में क्या बदलाव होंगे? यदि परिवर्तन होंगे तो किन नये लोगों को मंत्री पद दिया जाएगा? यह चर्चा पहले ही शुरू हो चुकी है. दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार पार्टी में असंतुष्ट नेताओं को कौन से मंत्री पद देंगे? यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा.





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