मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने सतारा के फाल्टन से बीजेपी नेता दिगंबर रोहित अग्रवाल को 11 करोड़ रुपये के मनी लांड्रिंग मामले में जमानत प्रदान की है। अग्रवाल को प्रवर्तन निदेशालय ने 6 जनवरी, 2024 को गिरफ्तार किया था और तब से वे हिरासत में थे। उनके खिलाफ स्थानीय पुलिस में दर्ज 21 अन्य मामले भी हैं। यह मामला कथित धोखाधड़ी से जुड़े ऋण और संपत्ति लेन-देन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय के मुंबई ज़ोनल यूनिट-II ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत शिकायत दर्ज की थी। एजेंसी का आरोप है कि अग्रवाल ने खराब क्रेडिट रेटिंग के चलते अपने दो सहयोगियों, रंजीत धूमल और प्रणय मातकर के नाम पर एम/एस जे.डी. केमिकल एंड फर्टिलाइज़र प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की और इसके माध्यम से ऋण प्राप्त किए।
ED का कहना है कि अग्रवाल ने कंपनी के माध्यम से फाल्टन में जमीन खरीदी और वित्तीय संसाधनों का गबन किया। मामले में अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी लेन-देन और कंपनियों के माध्यम से धन का अवैध हस्तांतरण किया। अदालत ने अग्रवाल की जमानत स्वीकार करते हुए उनकी गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में रखे गए समय को ध्यान में रखा। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि अग्रवाल पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन जमानत देने के बाद वे जांच में सहयोग करेंगे और किसी भी सबूत के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अग्रवाल के खिलाफ दर्ज अन्य 21 मामले भी विभिन्न अपराधों और विवादों से संबंधित हैं। हालांकि, यह मामला मनी लांड्रिंग और संपत्ति लेन-देन के आरोपों के कारण विशेष रूप से सुर्खियों में आया। अगले सुनवाई में अदालत और ED दोनों पक्षों के दावे और सबूतों की समीक्षा करेंगे। एजेंसी ने कहा है कि अग्रवाल की जमानत के बावजूद जांच जारी रहेगी और मामले में किसी भी संवेदनशील सूचना या वित्तीय डेटा की जांच जारी रहेगी।





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