मुंबई : मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण ने देश की पहली मोनो रेल में आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए सिग्नल सिस्टम में बदलाव शुरू कर दिया है। मोनो रेल का सफर अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एमएमआरडीए ने मेट्रो का सिग्नल सिस्टम मोनो रूट पर अपनाने का फैसला लिया है। एमएमआरडीए द्वारा संचालित मेट्रो-7 और मेट्रो-2 ए कॉरिडोर पर सीबीटीसी सिग्नल सिस्टम का इस्तेमाल होता है। सीबीटीसी तकनीक के तहत ट्रेन की हर वक्त रियल टाइम मॉनिटरिंग होती है।
मोनो के ट्रैक को कई ब्लॉक्स में बांटा गया
इसमें ट्रेन और कंट्रोल सेंटर के बीच लगातार डेटा संचार होता है, जिससे ट्रेन की लोकेशन और स्पीड का पता चलता है। जबकि मोनो के पुराने सिग्नल सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमैटिक नहीं हैं। इसमें मोनो के ट्रैक को कई ब्लॉक्स में बांटा गया है। एक समय में एक ब्लॉक से केवल एक ही ट्रेन गुजरती है। ट्रेन को शुरू करना, बंद करना, ब्रेक लगाना समेत कई अन्य कार्य मैनुअल तरीके से होते हैं। पुराने सिग्नल सिस्टम ने कई काम मैनुअल होने के कारण मेंटेनेंस में भी काफी समय लगता है।
…तो भी ट्रेन अपने आप रुक जाएगी
मोनो ट्रेन पर लग रहा सीबीटीसी सिग्नल सिस्टम ट्रेन की स्पीड नियंत्रित करने के साथ ही चालक को आगे के मार्ग की स्थिति से भी अगवत कराता रहेगा। इसकी सबसे बड़ी खूबी कि अगर चालक ट्रेन का ब्रेक लगाना भूल गया, तो भी ट्रेन अपने आप रुक जाएगी। नए सिस्टम में चालक को सिर्फ निगरानी करनी है, बाकी काम सिग्नल सिस्टम करेगा। इसके लिए ट्रैक पर सेंसर सिग्नल कंट्रोल यूनिट लगाई जाती है। मोनो के पूरे माग्र पर 32 जगहों पर इलेक्ट्रॉनिग इंटरलॉकिंग लगने हैं। 32 जगहों में से 5 जगह पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगाने का काम पूरा हो गया है। 260 वाईफाई एक्सेस पॉइंटस, 500 आरएफआईडी और 90 ट्रेन डिटेक्शन सिस्टम लगाने का काम कर लिया गया है।





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