मुंबई : केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की फडणवीस सरकर सोयाबीन किसानों को धोखा दे रही है. यह आरोप कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत ने लगाया है. उनका कहना है कि सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कई बार घोषणा की जा चुकी है लेकिन अभी तक वाजिब कीमत नहीं ल सकी है. सचिन सावंत के अनुसार मोदी सरकार ने इस साल सोयाबीन के लिए केवल 5,328 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है। लेकिन साल 2013 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए देवेंद्र फडणवीस ने एक किसान रैली निकाली थी और सोयाबीन के लिए 6,000 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग की थी. उस रैली को 12 साल हो गए हैं और मोदी सरकार के सत्ता में आने के 11 साल बाद भी किसानों के सोयाबीन को 6,000 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिला है।
सावंत ने कहा कि साल 2013 में जब फडणवीस किसानों के लिए सड़कों पर थे, तब जनता के सामने सवाल यह था कि क्या उनकी आवाज़ और भावनाएं सच्ची थीं या सिर्फ़ राजनीति का हिस्सा थीं। आज वे सत्ता में हैं, फिर भी वे अपने वादे को पूरा हीं कर सके हैं। यह भाजपा की कथनी और करनी में दोहरेपन का स्पष्ट उदाहरण है।
किसान बाज़ार में अपना सोयाबीन मात्र 3500 रुपये प्रति क्विंटल बेच रहे हैं। यानी किसानों को हर क्विंटल पर सीधे तौर पर 1800 से 2000 रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकार जानबूझकर एमआरपी केंद्र शुरू करने में देरी कर रही है। इस वर्ष खरीद केंद्रों के आवंटन में एक नया ‘शेयरधारक’ लाकर भ्रम की स्थिति पैदा की गई है। सावंत ने कहा कि पहले विपणन संघ के पास जो अधिकार थे, अब राजनीतिक दबाव में उन्हें बांट दिया गया है। इससे ख़रीद केंद्र शुरू करने में देरी हो रही है। भारी बारिश के कारण मूंग, उड़द, कपास, प्याज का उत्पादन पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। सोयाबीन का उत्पादन कम हुआ और कीमतें कम रहीं, इसलिए किसानों के पास कुछ नहीं बचा। सरकार ने दिवाली से पहले मदद देने का वादा किया था, लेकिन ये घोषणाएं हवा हवाई साबित हुई हैं।





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