मुंबई: जल्द ही मुंबई में बाइक टेक्सी चलना बंद हो सकती है। क्योंकि स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी एग्रीगेटर कंपनियों (ओला, उबर और रैपिडो) को दिया हुआ टेम्पररी बाइक टैक्सी लाइसेंस कैंसिल कर सकती है। दरसल मुंबई में एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा अनधिकृत तरीके से बाइक टैक्सी चलाई जा रही है। इस वजह से एक महिला यात्री ने अपनी जान भी गवां दी है, तो वहीं कई यात्री जख्मी भी हुए है। यही वजह है कि बुधवार को परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मामले पर बैठक ली। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी तीनों कंपनियों को जारी किए गए प्रोविजनल लाइसेंस रद्द करने पर आखिरी फैसला 2 दिनों में लेगी। यह कदम उन घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनसे बाइक टैक्सी सेफ्टी पर कई सारे सवाल खड़े किये है। हाल ही में, कल्याण में एक उबर बाइक टैक्सी सवार ने एक महिला पैसेंजर के साथ छेड़छाड़ की थी। यही वजह है कि ऐसी घटनाओं ने ऐप-बेस्ड बाइक टैक्सी सर्विस के राइडर वेरिफिकेशन, गाड़ी के नियमों का पालन न करने और रेगुलेटरी निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के पास लाइसेंस है अधिकार
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, जो एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ट्रांसपोर्ट) के अंडर काम करती है, के पास लाइसेंस देने और कैंसिल करने का कानूनी अधिकार है। सरनाइक ने एसटीए को रैपिडो, ओला और उबर को दिए गए टेम्पररी लाइसेंस रद्द करने का प्रोसेस शुरू करने के निर्देश दिए। आखिरी फैसला लेने के लिए अथॉरिटी की जल्द ही एक मीटिंग होनी है। अगर लाइसेंस रद्द हो जाते हैं, तो इन एग्रीगेटर्स कंपनियों द्वारा चलाई जाने वाली बाइक टैक्सी सर्विस मुंबई और राज्य के दूसरे हिस्सों में बंद कर दी जाएंगी, जिससे ऐप-बेस्ड टू-व्हीलर टैक्सी ऑपरेशन को झटका लगेगा, जिन्हें पहले भी रेगुलेटरी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
बता दें कि ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को पैसेंजर्स से अनसेफ राइड्स, अनवेरिफाइड राइडर्स और गैर-कानूनी ऑपरेशन्स के बारे में कई शिकायतें भी मिलीं है। अधिकारी ने कहा कि एनफोर्समेंट टीमों ने कई मौकों पर कंपनियों को चेतावनी दी, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ किया गया। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के मुताबिक, तीनों कंपनियां बाइक टैक्सी ड्राइवरों का रजिस्ट्रेशन करते समय कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं करती हैं। साथ ही, इलेक्ट्रिक बाइक के बजाय पेट्रोल बाइक के जरिए सर्विस जारी रखने के लिए कंपनी के खिलाफ अब तक 36 केस दर्ज किए जा चुके हैं।





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