तिरुवनंतपुरम : केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही हंगामेदार रही। स्पीकर ने दोषी कैदियों को दी गई पैरोल पर चर्चा के लिए लाए गए स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसके बाद नाराज यूपीडीएफ विधायकों ने सदन के अंदर ही प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी।
रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की विधायक केके रेमा ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में सजा हुई कई दोषियों को पैरोल देकर जेल से रिहा किया जा रहा है। इस पर स्पीकर एएन शमशीर ने प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मुद्दा इतना जरूरी नहीं है और इसे सामान्य चर्चा में उठाया जा सकता है।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
स्पीकर के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों को गैरकानूनी तरीके से पैरोल दी जा रही है। ये अपराधी बाहर आकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं। उन्होंने पूछा, “अगर सरकार किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती, तो ऐसे प्रावधान क्यों बनाए गए हैं।”
सतीशन ने सीपीआई एम) नेता और पयन्नूर नगरपालिका पार्षद वीके निषाद का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि पार्षद वीके निषाद को दिसंबर में 20 साल की सजा हुई थी, लेकिन एक महीने बाद ही उन्हें पैरोल दे दी गई।
विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए स्थानीय स्वशासन मंत्री एमबी राजेश ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि निषाद को 8 जनवरी को पैरोल दी गई थी, लेकिन विपक्ष ने पिछले महीने सत्र शुरू होने पर यह मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सदन में उठाने के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए ये प्रस्ताव लाया गया है। राजेश ने यह भी दावा किया कि पिछली ओमान चांडी सरकार के दौरान टीपी चंद्रशेखरन हत्याकांड के एक दोषी की सजा कम कर दी गई थी।





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