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ईरानी बैंक की एंट्री पर ‘रेड सिग्नल’, युद्ध ने ठंडे बस्ते में डाला 6 साल पुराना प्रोजेक्ट

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मुंबई : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग की वजह से अब ईरान के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक की मुंबई में शाखा खुलने पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. बैंक पासरगाद ने कई साल पहले भारत में अपनी शाखा खोलने की योजना बनाई थी और इसके लिए मुंबई को चुना था. पहली बार 2018 में बैंक ने मुंबई में शाखा खोलने का प्रस्‍ताव दिया था. अब युद्ध की वजह से भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया में और देरी होने की आशंका है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है मध्‍य-पूर्व के मौजूदा अस्थिर हालात को देखते हुए इस प्रस्ताव पर जल्द फैसला होने की संभावना न के बराबर है.
बैंक पासरगाद का भारत में शाखा खोलने का प्रस्ताव पहली बार 2018 में चर्चा में आया था. हालांकि, आरबीआई इस संबंध में तभी अंतिम निर्णय ले सकता है जब उसे वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से स्पष्ट मंजूरी मिल जाए. वर्तमान में वित्तीय सेवा विभाग और राजस्व विभाग आरबीआई की तकनीकी टिप्पणियों का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं. हाल ही में एक आंतरिक सरकारी दस्तावेज में इस मामले पर संबंधित विभागों से “तेजी से” फीडबैक मांगा गया था, लेकिन युद्ध की ताजा स्थिति ने पूरी प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
अमेरिकी ने 2020 में लगाया प्रतिबंध
2018 में भारत-ईरान संयुक्त घोषणा में व्यापारिक लेनदेन के लिए प्रभावी बैंकिंग चैनल की आवश्यकता पर जोर दिया गया था. बयान में कहा गया था कि बैंक पासरगाद को भारत में शाखा खोलने की अनुमति पर उन्नत स्तर पर विचार चल रहा है. 8 अक्टूबर 2020 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस बैंक सहित ईरान के 17 अन्य प्रमुख बैंकों पर प्रतिबंध लगा दिए थे.
इन प्रतिबंधों के तहत, बैंक के साथ वित्तीय लेनदेन करने वाले किसी भी संस्थान पर “द्वितीयक प्रतिबंध” का खतरा बना रहता है. इसके अतिरिक्त, अगस्त 2025 में अमेरिका ने बैंक की तकनीकी सहयोगी कंपनी एफएएनएपी पर भी बैन बढ़ा दिए, जिस पर निगरानी तकनीक विकसित करने का आरोप है. भारत के लिए इन वैश्विक प्रतिबंधों के बीच बैंक को अनुमति देना एक जटिल विषय बन गया है.