मुंबई : मुंबई में बिकने वाले अधिकांश इडली, वड़े और डोसा धारावी की गलियों में बसे छोटे – छोटे घरों और इंडस्ट्री में बनते हैं। लेकिन एलपीजी की कमी के चलते अब 70 प्रतिशत बिज़नेस ठप पड़ चुके हैं। इसमें घरों में बनाने वाले छोटे व्यवसाय से लेकर इडली इंडस्ट्री दोनों शामिल ही। बिज़नेस मालिकों से बात करने पर पता चला कि उनके इंडस्ट्री और दुकानों में काम करने वाले 80 फीसदी लोग अपने गांव का रुख कर चुके हैं।
इडली बनाने वाली 6 कंपनियां बंद
होलसेल इडली विक्रेता राज नादर ने बताया कि उनके पास एक होटल भी है , जहां 10 कर्मचारी काम करते थे, फिलहाल 2 ही बचे है। रसोई गैस की किल्लत शुरू होने के बाद से 8 गांव जा चुके हैं। बता दें कि धारावी में 6 कंपनियां ऐसी हैं, जो दिन में 50 000 से 1 लाख इडली बनाती हैं। मुंबई के अलग-अलग इलाकों के वेंडर उनसे इडली ले जाते और बेचते हैं। अब एलपीजी सिलिंडर की कमी ने इस बिज़नेस को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इनमे से 4 कंपनियों में ताला लग चुका है।
12 मार्च से ही पड़ने लगा था इफेक्ट
बता दें कि धारावी की दुकानें बंद होना शुरू हो चुकी थींं। बिज़नेस करने वालों ने उत्पादन की संख्या में कमी की थी। उस वक्त भी एलपीजी के कमी के चलते संचालक परेशान थे और अब उनकी यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें दुकान का किराया देना होता है। काम करने वाले लोगों को पगार देना होता है। यहां तो इतनी काला बाजारी चल रही है कि घर के लिए सिलिंडर मिलना मुश्किल हो चुका है। इस वजह से बहुत से मुंबईकरों को उनका पसंदीदा नाश्ता नहीं मिल पा रहा है।
घर से छोटा व्यवसाय करने वालों का कहना है कि अब 15 दिनों से ज्यादा हो चुका है। जो उम्मीद थी वो भी ख़तम हो चुकी है। बच्चों का एग्जाम ख़तम होते ही हम गांव चले जाएंगे। स्थिति सुधरने पर ही लौटेंगे।





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