मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने लाडली बहन योजना के तहत 68 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया है। इससे सरकार का सालाना 12240 करोड़ रुपये बचेगा। वहीं लाडली बहन योजना पर वार्षिक खर्च 43740 करोड़ से घटकर 31500 करोड़ रुपये रह जाएगा। सरकार ने लाडली बहन योजना के लिए ई-केवाईसी की डेडलाइन 30 अप्रैल तक बढ़ा दी है। पहले लाडली बहन योजना का ई-केवाईसी 31 मार्च तक था। महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि योजना से 68 लाख महिलाओं के नाम बाहर होने से अब दूसरे विभागों से निधि लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एकनाथ शिंदे सरकार ने जुलाई 2024 में राज्य में लाडली बहन योजना शुरू की थी। शुरुआत में इस योजना के तहत करीब 2 करोड़ 47 लाख महिलाएं लाभार्थी थीं, इनमें से 31 मार्च 2026 तक 1 करोड़ 75 लाख महिलाओं ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा किया। वहीं 68 लाख महिलाएं अपात्र होकर योजना से बाहर हो गई।
ई केवाईसी जरूरी होने का मिला सरकार को फायदा
लाडली बहन योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1500 रुपये की किश्त दी जा रही है। लेकिन अपात्र महिलाओं द्वारा योजना का लाभ लेने की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने 18 सितंबर 2025 को परिपत्र जारी कर योजना का लाभ लेने के लिए दो माह के भीतर ई-केवाईसी करना अनिवार्य किया था।
अपात्र महिलाओं को मिले 20 हजार करोड़
आखिरकार इस योजना से 68 लाख महिलाएं बाहर हो गईं। वहीं अब 1 करोड़ 75 लाख महिलाएं इस योजना के लिए पात्र पाई गई हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पिछले 20 महीने में अपात्र महिलाओं के खाते में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक जमा किए गए हैं। अब इन महिलाओं के योजना से बाहर होने से राज्य सरकार का हर साल लगभग 12240 करोड़ रुपये बचेगा। इस योजना के लिए कुल 43740 करोड़ रुपये साल में खर्च होने का अनुमान था, जो अब घटकर 31500 करोड़ रुपये रह जाएगा।





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