ठाणे : ठाणे की राजनीति में इन दिनों खलबली मची हुई है। दरअसल, भाजपा नेता पूर्व सांसद किरीट सोमैया और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक में ठनी हुई है। बीते दिनों में शिवसेना विधायक व प्रवक्ता प्रताप सरनाईक पर जहां ईडी ने दबिश दी थी और अब सुप्रीम कोर्ट के कारण बच गए हैं।
इन दिनों में भाजपा नेता सोमैया ने प्रताप सरनाईक द्वारा दो इमारतों का अवैध निर्माण करने का आरोप लगाते हुए उस पर पिछले आठ साल से मनपा की तरफ से कोई कार्रवाई न किये जाने पर आश्चर्य जताया है। सोमैया के इस आरोप पर सरनाईक भड़क गए हैं और उन्होंने सोमैया के दावे को पूरी तरह से गलत बताया है और उन पर 100 करोड़ का मानहानि का दावा करने की बात कही है।
बुधवार को ठाणे भाजपा कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार परिषद में सोमैया ने बताया कि वे शीघ्र ही ठाणे पुलिस के वर्तक नगर पुलिस स्टेशन में सरनाईक के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे। सोमैया के मुताबिक सरनाईक की अध्यक्षता वाले विहंग ग्रुप ऑफ कंपनीज ने विहंग गार्डन में छह इमारतों का निर्माण किया है। जिसमें से इमारत ए के चार विंग को ओसी मिला है, लेकिन इमारत बी 1 और बी 2 के 9 से 13 यानी पांच मंजिलों के अवैध होने के चलते उसे ओसी नहीं मिली है।
सोमैया के मुताबिक वर्ष 2012 में इसे तुरंत तोड़ने का आदेश दिया गया था। सोमैया के अनुसार उक्त आदेश के बाद सरनाईक की अपील पर कुछ शर्तों के साथ अवैध निर्माण को तोड़ने का काम उस समय रोक दिया गया था। सोमैया ने बताया कि तत्कालीन ठाणे मनपा आयुक्त ने एक माह की मोहलत दी थी, लेकिन उसे आज आठ साल बीत गए और मनपा की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सोमैया का आरोप है कि जनप्रतिनिधि सरनाईक ने अवैध निर्माण कर आम भोले भाले लोगों के साथ धोखाधड़ी की और शिवसेना के अस्तित्व वाली मनपा की तरफ से उन्हें अवैध निर्माण के लिए संरक्षण मिला। सोमैया ने लोगों की ठगी करने वाली विहंग ग्रुप ऑफ कंपनीज तथा प्रताप सरनाईक के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की है। सोमैया ने इस बारे में ठाणे मनपा में भाजपा गट नेता संजय वाघुले के साथ संबंधित मनपा अधिकारियों से भी मुलाकात की है।
हालांकि प्रताप सरनाईक का कहना है की तत्कालीन मनपा आयुक्त ने तीन मंजिलों के अवैध होने की नोटिस जारी की थी। बाद में लोकमान्य नगर में मनपा स्कूल की इमारत बना कर देने के टीडीआर के एवज में उन्हें मनपा की तरफ से मिले एफएसआई और कुछ दंड लगाकर उनकी इमारत के अवैध मंजिलों को मनपा की तरफ से अनुमति मिली थी। लेकिन दंड की राशि कुछ अधिक होने के चलते मनपा में उक्त मामला अभी सुलझ नहीं पाया है, जिसके चलते ओसी में विलम्ब हो रहा है।





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