मुंबई : मुंबई की आबोहवा पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं है। यहां के लोग प्रदूषण भरा सफर करने के लिए मजबूर हैं। हवा में जहर भर गई है। सिर्फ मुंबई शहर ही नहीं दोनों उपनगर, नई मुंबई सहित कई स्थानों पर हवा गुणवत्ता दूषित हो गई है। इसके लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार माना जा रहा है जबकि वास्तव में लॉकडाउन में ढील के बाद सड़कों पर भारी संख्या में वाहनों का चलना भी प्रदूषण बढ़ने की वजह है।
मौसम विभाग के पश्चिम जोन प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक कृष्णानंद होसालीकर ने बताया कि मुंबई में हवा की गुणवत्ता को सुधरने में वक्त लगेगा। फिलहाल अगले कुछ दिनों तक खराब रहने की उम्मीद है। मुंबई में वर्तमान में हवा गुणवत्ता सूचकांक ३३० है।
मुंबई में सुबह कड़ाके की ठंड और जलवायु में परिवर्तन की वजह से मौसम में आर्द्रता अधिक है। छोटे कण हवा में तैरते हैं। हवाएं नहीं चलने से धूल के कण आसमान में ही रहते हैं, जिस वजह से प्रदूषण बढ़ रही है।
उधर प्रदूषण संबंधी मामलों के जानकार बताते हैं कि लॉकडाउन में ढील के बाद निजी वाहन सड़कों पर भारी संख्या में उतरे हैं, जिस वजह से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। होसालीकर ने कहा कि खराब प्रदूषण के चलते बुजुर्ग, बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। जिन्हें सांस लेने की समस्या है, उनके लिए यह घातक भी है। लोगों से अपील है कि घर से संभलकर निकलें। स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत डॉक्टरों की सलाह लें।
मेट्रोलॉजी विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोलाबा, हाजीअली, चर्चगेट, मझगांव, वर्ली, सेंचुरी बाजार, परेल, शिवाजी पार्क दादर, बीकेसी, बांद्रा अंधेरी-पश्चिम, कुर्ला, मालाड, भांडुप, चेंबूर आदि क्षेत्र में हवा बेहद खराब है।
केंद्र सरकार का संस्थान ‘सफर’ वायु की गुणवत्ता दर्शाता है। संस्थान के वेबसाइट पर मुंबई, पुणे, दिल्ली, अमदाबाद इन चार शहरों की वायु गुणवत्ता को दर्शाई गई है। संस्थान ने नए साल के दूसरे सप्ताह में मुंबई के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में वायु प्रदूषण में वृद्धि दर्ज की है।




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