मुंबई, देश में सबसे ज्यादा कोरोना वायरस का प्रकोप महाराष्ट्र में दिखाई दे रहा है लेकिन यहां संक्रमित मरीजों का उपचार जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। गंभीर रोगियों के उपचार को लेकर केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय टीम को काफी खामियां मिली हैं।
टीम ने जानकारी दी है कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीजों का उपचार जूनियर डॉक्टरों के भरोसे किया जा रहा है। सीनियर डॉक्टर कोविड-19 के मरीजों को देखने तक नहीं आ रहे हैं।
टीम ने अपनी रिपोर्ट में नागपुर के कुछ अस्पतालों का जिक्र करते हुए कहा है कि राज्य को चिकित्सीय प्रबंधन पर तत्काल काम करना चाहिए। इसके साथ साथ हर अस्पताल में डेथ ऑडिट को भी टीम ने जरूरी बताया है।
महाराष्ट्र से लौटने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को उच्च स्तरीय टीम ने छह पेज की रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें यहां तक लिखा है कि जिला स्तर पर कोरोना के खिलाफ काम करने के लिए आयुष डॉक्टरों को साथ में लेना जरूरी है। ताकि इम्युनिटी को लेकर भी लोगों में काम किया जा सके।
अभी महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है कि गैर शिक्षित झोलाछाप काफी सक्रिय हैं। इनके खिलाफ भी ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
जानकारी के मुताबिक पिछले सप्ताह स्वास्थ्य मंत्रालय के निपुन विनायक की निगरानी में तीन सदस्यों की टीम महाराष्ट्र के दौरे पर रवाना हुई थी। इसमें एनसीडीसी के उपनिदेशक डॉ. संकेत कुलकर्णी और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय क्षय एवं श्वसन रोग संस्थान के प्रोफेसर डॉ. आशीष रंजन शामिल थे।





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