मुंबई, कोरोना महामारी जैसे संकट के समय भी रिश्वतखोर शांत नहीं बैठे। वर्ष २०२० की तुलना में इस साल के पहले छह महीनों में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा लगाए गए ट्रैप की संख्या में ३१ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष २०२१ के जनवरी महीने से जून तक एसीबी ने ५३४ रिश्वतखोरों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेलखोर बना दिया।
बता दें कि मार्च, २०२० में जैसे ही कोरोना वायरस अपने पैर पसारने लगा इसके बाद महाराष्ट्र में संचारबंदी लागू कर दी गई। सरकारी कार्यालयों में निजी कार्यालयों की तरह कर्मचारियों की उपस्थिति पर भी प्रतिबंध लगाया गया था, जिसकी वजह से सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी में कमी दर्ज की गई थी। वर्ष २०२० में जनवरी से लेकर जून के पहले छह महीनों में २९६ ट्रैप लगाए गए। इस ट्रैप में राज्य भर में ४१४ रिश्वतखोरों को गिरफ्तार किया गया। पहली लहर थमने के बाद कड़े प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील दी गई। दूसरी लहर शुरू होते ही प्रतिबंध एक बार फिर से कड़े कर दिए गए। दूसरी लहर में इन सख्त प्रतिबंधों का रिश्वतखोरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इस साल के पहले छह महीनों में ट्रैप की संख्या ३१ फीसदी बढ़कर ३८९ हो गई। रिश्वत लेनेवालों की संख्या १२० से बढ़कर ५३४ हो गई।
रिश्वतखोरी के सालाना आंकड़ों पर नजर डालें तो आमतौर पर मुंबई और पुणे विभाग सबसे ऊपर रहता है। लेकिन इस साल के पहले छह महीनों में संभाजीनगर इस सूची में सबसे ऊपर है। वहां एसीबी द्वारा ७९ ट्रैप लगाए गए और १०९ रिश्वत लेनेवालों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पुणे में ७८ मामलों में १०५ और नासिक जिले में ६७ ट्रैप में ८९ को गिरफ्तार किया गया है।





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