मुंबई : पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की शिकायत पर महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ करीब तीन महीने पहले सीबीआई की जांच शुरू हुई। अब खुद परमबीर सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू हो सकती है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को सीबीआई से इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी कर परमबीर सिंह की मुसीबतें और बढ़ा दीं कि (प्र) शासन प्रमुख यह दावा नहीं कर सकता कि वह निर्दोष है, बल्कि वह बराबर का जिम्मेदार है। हाई कोर्ट की यह टिप्पणी अपरोक्ष रूप से सचिन वाझे की 16 साल निलंबन के बाद पुलिस में बहाली को लेकर थी।
हाईकोर्ट के अनुसार, कोई भी प्रशासन प्रमुख यह कहकर बेगुनाही का दावा नहीं कर सकता कि केवल कार्यपालिका के आदेशों का पालन कर रहा था। प्रशासन का मुखिया भी उतना ही जिम्मेदार होता है। हो सकता है, मंत्री ने सचिन वाझे को बहाल करने को कहा हो, लेकिन क्या प्रमुख और शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन किए बिना आदेशों का पालन कर सकता है? इसके बाद हाईकोर्ट के न्यायधीश शिंदे ने कहा कि हम सीबीआई से जांच का दायरा बढ़ाने की उम्मीद करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सीबीआई यह पता लगाएगी कि षडयंत्रकारी कौन है?
सचिन वाझे के नाम के इस संदर्भ की यहां कई वजह से अहमियत है। परमबीर सिंह ने मार्च में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अनिल देशमुख के संबंध में जब पत्र लिखा था, तो आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने सचिन वाझे पर हर महीने 100 करोड़ रुपये की उगाही का दबाव डाला था। उसी के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर केस सीबीआई को गया था। बाद में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू कर दी, जिसमें सचिन वाझे का जेल जाकर स्टेटमेंट लिया गया। सीबीआई भी सचिन वाझे का कई बार स्टेटमेंट ले चुकी है।
सचिन वाझे की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट यानी सीआईयू में नियुक्ति किसने की, यह रहस्य किसी से छिपा नहीं है। सचिन वाझे की सीआईयू में पोस्टिंग का विरोध तत्कालीन मुंबई क्राइम ब्रांच चीफ संतोष रस्तोगी ने किया था, यह रहस्य भी किसी से छिपा नहीं है। संतोष रस्तोगी इन दिनों NIA में हैं, जो एंटीलिया जिलेटिन और हिरेन मनसुख मर्डर की जांच कर रही है।
NIA परमबीर सिंह का स्टेटमेंट ले चुकी है, उन्हें अभी तक इस केस में आरोपी नहीं बनाया है। पर मुंबई पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, जब परमबीर सिंह का स्टेटमेंट लिया गया था, तब तक क्राइम ब्रांच के सीनियर इंस्पेक्टर सुनील माने और पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। क्या माने और शर्मा ने परमबीर सिंह का नाम लिया, इसके बारे में अधिकृत रूप से कुछ पता नहीं चल सका है। लेकिन जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, परमबीर सिंह की धुक-धुक बनी रहेगी।
खुद महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस की तरफ से परमबीर सिंह के खिलाफ कई जांच बैठा दी गईं हैं। इसलिए मुंबई पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, आश्चर्य नहीं होगा, यदि आने वाले दिनों में परमबीर सिंह के खिलाफ कोई बड़ा कानूनी ऐक्शन हो। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि सचिन वाझे मुंबई पुलिस में सिर्फ परमबीर सिंह को रिपोर्ट करते थे।





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