मुंबई, अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए अपराधियों को जमानत, पैरोल या फर्लो पर रिहा किया जाना चाहिए या नहीं, ये हमेशा चर्चा और विवाद का विषय रहा है। खासकर हत्या-रेप, अपहरण और डवैâती जैसे मामलों में वैâदियों को मिलने वाली कानूनी सहूलियत पर अक्सर विवाद होता है। क्योंकि कई बार वैâदी इन कानूनी सहूलियतों का उपयोग नए अपराध करने या बदला लेने के लिए करते हैं। पैरोल पर जेल से छूटे वैâदियों के फरार होने की खबरें तो अब आम हो गई हैं। अक्सर जेल से बाहर निकलने का मौका मिलने पर वैâदी फरार हो जाते हैं। बाद में पुलिस को उन्हें दुबारा गिरफ्तार करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। जमानत, पैरोल या फर्लो मिलने के बाद फरार हुए ऐसे दर्जनों वैâदी होंगे जिनकी पुलिस वर्षों से तलाश कर रही है। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) नोएडा यूनिट द्वारा बीते रविवार को गिरफ्तार किया गया एक वांछित आरोपी कुछ ऐसी ही वजहों से सुर्खियों में है।
यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने रविवार को २५ हजार रुपए के इनामी बदमाश फहीमुद्दीन को दिल्ली के मुस्तफाबाद से गिरफ्तार किया। हत्या के एक मामले में उसे अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिली थी। लेकिन अपील पर मिली जमानत के दौरान जेल से बाहर आया था, उसके बाद फरार हो गया था। उस पर २५ हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।
बताया जाता है कि फहीमुद्दीन बुलंदशहर के कुख्यात अपराधी मेहरबान का साथी रह चुका है। मेहरबान के गिरोह ने वर्ष २००१ में बुलंदशहर के चावल व्यापारी यासीन कुरैशी की उसी के घर में गोली मार कर हत्या कर दी थी। हत्या की वह वारदात हैवानियत के कारण कई दिनों तक सुर्खियों में रही थी क्योंकि हत्यारों ने गोली मारने के बाद यासीन कुरैशी का गला भी रेत दिया था। उस वारदात में मेहरबान के साथ फहीमुद्दीन भी शामिल था। अदालत ने उस मामले में उसे वर्ष २०१९ में उम्रवैâद की सजा सुनाई। फहीम इसके बाद भी मेहरबान के साथ कई वारदातों में शामिल था। फहीमुद्दीन के खिलाफ बुलंदशहर में कुल छह आपराधिक मुकदमे दर्ज हैंै। लूट का एक मामला अदालत में अभी भी विचाराधीन है।
अभियुक्त मेहरबान बुलंदशहर के रुकन सराय थाना अंतर्गत मनिहारों वाला कुआं क्षेत्र का निवासी था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, डवैâती और लूट जैसी गंभीर धाराओं में करीब ३ दर्जन मामले दर्ज थे। वह लगभग दो दशक तक आपराधिक दुनिया में सक्रिय रहा। इस दौरान यूपी, दिल्ली और राजस्थान के सीमाई क्षेत्रों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा। २० फरवरी, २००१ को चावल व्यापारी यासीन कुरैशी की हत्या करने के बाद मेहरबान और उसके गिरोह ने बुलंदशहर के थाना खुर्जानगर क्षेत्र में बैंक से पैसा निकालकर जा रहे रामपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी तथा १५ लाख रुपए लूट लिए थे। इसी तरह मेहरबान और फहीमुद्दीन के गिरोह ने २७ मई, २०१९ को थाना क्षेत्र जारचा जनपद गौतमबुद्धनगर में वीआरएफ फूड्स लिमिटेड, गुलावठी, बुलंदशहर के वैâशियर से ६५ लाख रुपए दिनदहाड़े लूट लिए थे। गौतम बुद्ध नगर के थाना जारचा में इसकी शिकायत दर्ज हुई थी। उपरोक्त घटना में मेहरबान वांछित था, जबकि फहीमुद्दीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक ने ७ जून, २०१९ को मेहरबान के खिलाफ १ लाख रुपए का इनाम घोषित कर दिया था। वर्ष २०१९ में चावल व्यापारी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट ने फहीमुद्दीन और मेहरबान को आत्मसमर्पण करने का आदेश सुनाया था, लेकिन वे फरार ही रहे। १८ जुलाई, २०१९ को गाजियाबाद जनपद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र में मेहरबान का यूपी एसटीएफ तथा गाजियाबाद पुलिस से सामना हो गया। उस मुठभेड़ में अपराधी मेहरबान की मृत्यु हो गयी। पुलिस को उसके पास से १ बंदूक, १ रिवॉल्वर तथा काफी मात्रा में जिंदा कारतूस व १ सेंट्रो कार मिली थी।





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