Home Crime ५० हजार के लिए कत्ल, कातिल दोस्तों को मिली उम्रकैद की सजा

५० हजार के लिए कत्ल, कातिल दोस्तों को मिली उम्रकैद की सजा

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मुंबई, दोस्त को भाई का दूसरा रूप कहा जाता है। वर्तमान समय में पैसों के बढ़ते मोल के कारण जब तमाम रिश्ते-नाते महत्व खो रहे हैं, तब किसी दोस्त से बहुत ज्यादा उम्मीद रखना भी बेमानी हो जाता है। अर्थात अब दोस्त भी दोस्त नहीं रह गए हैं। मतलबी दुनिया के लिए सिर्फ धन का महत्व रह गया है। यानी कि सबसे बड़ा रुपैया। आज की कहानी कुछ ऐसी ही है।
ये कहानी है मुजफ्फरनगर के शहजाद की, जो अपने ही दोस्तों की दगाबाजी का शिकार बन गया था। शहजाद के पास ५० हजार रुपए हैं, ये बात उसके दोस्त को पता चल गई और फिर उन्हीं ५० हजार रुपयों के लिए शहजाद के दोस्त पैâजान ने साजिश रची और धोखे से उसकी हत्या कर दी। पैâजान ने सबूत मिटाने के लिए शहजाद की लाश को दफना भी दिया था। लालच में हैवान बना पैâजान, अपने एक अन्य दोस्त को भी साथ में ले डूबा।
हरिद्वार जनपद के मंगलौर निवासी गफूर का पुत्र शहजाद देवबंद तहसील के गांव राज्जोपुर में गोश्त की दुकान चलाता था। उसकी दुकान के बराबर में ही बागोवाली थाना नई मंडी निवासी नियामत के पुत्र पैâजान की भी दुकान थी। बताया जाता है कि शहजाद और पैâजान की अच्छी दोस्ती थी। शहजाद ने धंधे से बचाकर करीब ५० हजार रुपए जुटाकर रखे थे। इसकी भनक किसी तरह पैâजान को लग गई और वह शहजाद के उन रुपयों को पाने के लिए साजिश रचने लगा। उसी दौरान शहजाद को किसी कार्यवश अपनी बहन के घर जाना पड़ा। बहन के घर जाते समय शहजाद कपड़ों के साथ अपने ५० हजार रुपए भी साथ ले गया था। यह बात किसी तरह पैâजान को पता चल गई। पैâजान ने सोचा यही सही मौका है और वह अपने भाई के साथ शहजाद को मिलने पहुंच गया। २६ जून, २०११ को पैâजान, शहजाद को उसकी बहन जहीरा के घर से बुलाकर अपने साथ ले गया था। लेकिन उसके बाद शहजाद वापस घर नहीं लौटा। एक दिन बाद पैâजान और साजिद, जहीरा के घर पहुंचे और कपड़े देते हुए उसे बताया कि शहजाद मंगलौर चला गया है।
शहजाद जब कई दिनों बाद भी मंगलौर नहीं पहुंचा तो जहीरा ने इसकी जानकारी अपने दूसरे भाई जहीर को दे दी, जिसके बाद जहीर ने शहजाद की तलाश शुरू की। इस प्रयास में गांव के ही नसीम उर्फ कल्लू तथा कर्रार ने बताया कि उन्होंने शहजाद को पैâजान तथा साजिद के साथ बाइक पर जाते देखा था। जहीर ने शहजाद के गुमशुदगी की शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी। बरला चौकी थाना छपार पर तैनात पुलिसकर्मियों ने शहजाद की तलाश शुरू की गई तो २७ जून को उन्हें एक लावारिस शव मिला। चार दिन बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। स्वजन ने कपड़ों से मृतक की पहचान की। वह शव शहजाद का ही था। पुलिस ने इस मामले में जहीर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पैâजान तथा साजिद को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी पैâजान व साजिद ने कबूल कर लिया कि उन्होंने शहजाद को उसकी बहन के घर से बुलाया था। उस वक्त शहजाद अपने साथ ५०,००० रुपए भी ले आया। उसी रुपए के लिए उन्होंने शहजाद की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। बाद में उसका शव छपार में दफना दिया था, जो बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया था।