मुंबई, प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) से संबंधित एक घोटाला सामने आया है। मामला शहर के कांदिवली स्थित पीएफ कार्यालय का है। यहां के कुछ कर्मचारियों ने पीएफ पूल से 21 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पर हाथ साफ कर दिया था। कार्यालय की आंतरिक जांच में यह मामला सामने आया है। इसी दफ्तर में काम करने वाले एक क्लर्क को मामले का मुख्य संदिग्ध आरोपी बताया जा रहा है।
मुंबई के कांदिवली स्थित ईपीएफओ के यूनिट-2 कार्यालय में एक क्लर्क ने कुछ अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार इसी कार्यालय की चारकोप ब्रांच (यूनिट-2) में क्लर्क चंदन कुमार (37) को इस घोटाले का मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पूरे घोटाले में चंदन के साथ एक उसका साथी कर्मचारी अभिजीत ओनेकर और कुछ अन्य कर्मी भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार ये लोग गरीबों, मजदूरों के बैंक खाते और उनके आधार की जानकारी हासिल कर लेते थे। इसके बाद इनके पीएफ खाते खोले जाते थे और इन खातों में पीएफ पूल से पांच लाख रुपये तक की राशि डाल दी जाती थी। जांच में पता चला है कि चंदन और अभिजीत ने ऐसे 817 खातों और आधार कार्डों की मदद से करोड़ों रुपये का हेरफेर किया। वहीं, इन खाताधारकों को भी कुछ रुपये दे दिए जाते थे।
जिन लोगों पर घोटाला करने का आरोप है, कहा जा रहा है कि उन्हें विभागीय ऑडिट की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी थी। उन्होंने ऐसी गलतियां की ही नहीं जो उन्हें संदेह के दायरे में लेकर आतीं। वहीं, कोरोना काल में सरकार ने पीएफ से राशि निकालने के नियमों में ढील भी दी थी। ये लोग पांच लाख रुपये से कम की राशि की भेजते थे। वरिष्ठ अधिकारी पांच लाख रुपये से अधिक के लेनदेन का ही निरीक्षण करते हैं।
इस घोटाले को लेकर आपराधिक मामला दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा इसकी जांच सीबीआई को देने की मांग किए जाने के भी संकेत मिले हैं। कांदिवली पीएफ कार्यालय में पिछले दो साल में जिन खातों से पैसे निकाले गए हैं उनका ऑडिट किया जाएगा। जानकारी के अनुसार ऐसे कुल खातों की संख्या 12 लाख के आस-पास है। मामले में चंदन और अभिजीत समेत पांच लोग निलंबित किए गए हैं।
21 करोड़ रुपये से अधिक के इस घोटाले का मुख्य संदिग्ध चंदन कुमार सिन्हा यूं तो क्लर्क है लेकिन उसके पास महंगी कार से लेकर हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल तक है।
जानकारी के अनुसार वह बिहार के गया जिले का रहने वाला है। चंदन कुमार सिन्हा ने मगध विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की है।
इस घटनाक्रम में चंदन और उसके सहयोगी अभिजीत समेत कुल पांच लोगों को निलंबित कर दिया गया है।





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