कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब विवाद की आंच अब महाराष्ट्र तक पहुंच गई है। एआईएमआईएम कार्यकर्ताओं ने महिला मुस्लिम छात्रों के लिए ‘हिजाब’ के समर्थन में महाराष्ट्र के बीड शहर में बैनर लगाए और कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को उनकी धार्मिक संस्कृति का पालन करने का अधिकार देता है।
बीड के बशीरगंज और करंजा इलाकों में सोमवार को ‘पहले हिजाब फिर किताब’ (हिजाब पहले, किताब बाद में) का संदेश देने वाले बैनर लगाए थे। इन बैनर को सोमवार को लगाया गया था जिसे मंगलवार को हटा दिया गया। बीड शहर के पुलिस थाने के इंस्पेक्टर रवि सनप ने बुधवार को बताया बीड में स्थिति शांतिपूर्ण है। हमने उन्हें (कार्यकर्ताओं) से कहा कि उन्होंने बिना अनुमति के बैनर लगाए हैं। उन्होंने बतों को समझा और उसे हटा दिया।
बीड में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के छात्र विंग के सदस्य लुकमान फारूकी ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को उसकी धार्मिक संस्कृति का पालन करने का अधिकार देता है, और जो लोग ‘हिजाब’ का विरोध वो पहले संविधान को पढ़ें। उन्होंने कहा, इसलिए लोगों के बीच इस संदेश को पहुंचाने के लिए हमने एक दिन के लिए बीड में हिजाब के समर्थन में बैनर लगाए थे।
कर्नाटक में हिजाब का मुद्दा काफी गंभीर हो गया है। हिजाब के सपोर्ट और विरोध के लेकर कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए। राज्य सरकार ने स्थिति पर काबू पाने के लिए मंगलवार को सभी हाई स्कूल और कॉलेज को अगले तीन दिन तक के लिए बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।
स्कूल में हिजाब पहनने का यह मामला हाई कोर्ट भी पहुंच गया है। बुधवार को दूसरे दिन सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। अभी तक इस मामले को सिंगल बेंच ही देख रही थी। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कृष्ण दीक्षित ने कहा मुझे लगता है कि इस केस को बड़े बेंच को भेजने की जरूरत है।





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