नई दिल्ली, डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार हो रही गिरावट से देश में खलबली मच गई है। रुपए में रिकॉर्ड गिरावट के चलते कल भारतीय रुपया रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया कल ०.३८ फीसदी की कमजोरी के साथ ७८.१४ के स्तर पर खुला था। खुलने को बाद इसमें और गिरावट आई और यह ०.५६ फीसदी की कमजोरी के साथ ७८.२८ के स्तर तक पहुंच गया। जानकारों का कहना है कि फिलहाल इसमें गिरावट थमती नजर नहीं आ रही है। मनीकंट्रोल डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अभी तक भारत की विनिमय दर दबाव में रही। रुपए के गिरने का मूल कारण जानकार कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को मान रहे हैं। भारत अपनी र्इंधन जरूरतों का लगभग ८५ प्रतिशत आयात करता है। देश का क्रूड ऑयल बास्केट प्राइस एक दशक के उच्च स्तर पर पर पहुंच गया है।
रुपए में लगातार आ रही गिरावट का सबसे अहम कारण विदेशी फंडों की बिकवाली है। भारतीय इक्विटी और बांड बाजारों से लगातार डॉलर की निकासी हो रही है। ग्लोबल मार्वेâट में जोखिम से बचने की रणनीति के तहत विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार अपने पैसे निकाल रहे हैं। जनवरी के बाद से अब वे २४ अरब डॉलर निकाल चुके हैं। फॉरेक्स डीलरों का कहना कि अगर देश में डॉलर की निकासी इसी गति से जारी रहती है तो रुपया और गिर सकता है।
पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल के दाम बढ़ने के बाद अब आम आदमी पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। सरकार जीएसटी की सबसे कम स्लैब पर टैक्स की दर बढ़ा सकती है। इसका असर सीधे आम आदमी पर पड़ेगा। जीएसटी काउंसिल की होनेवाली अगली बैठक में सबसे कम टैक्स स्लैब को ५ फीसदी से बढ़ाकर ८ फीसदी किया जा सकता है। इसके साथ ही जीएसटी व्यवस्था में छूट की सूची को कम किया जा सकता है। राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक समिति इस महीने के अंत तक अपनी रिपोर्ट जीएसटी काउंसिल को सौंप सकती है। इसमें सरकार की कमाई यानी राजस्व बढ़ाने के लिए अलग-अलग कदमों का सुझाव दिया गया है।





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