मुंबई, कभी खस्ता हालत से गुजर रही मुंबई महानगरपालिका के स्कूलों के बाहर अब अभिभावकों की कतार देखकर लोगों को आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन यह सच है कि मनपा के स्कूलों के दिन अब एक बार फिर लौट रहे हैं। मनपा स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों को दी जानेवाली सुविधाओं और नि:शुल्क शिक्षा ने तो अभिभावकों का ध्यान खींचा ही है, किंतु इंग्लिश मीडियम के स्कूल शुरू होने के बावजूद लोग निजी स्कूलों की तुलना में अपने बच्चों को मनपा स्कूलों में पढ़ाना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। उसी का परिणाम है कि इन दिनों एक लाख ५ हजार बच्चों ने मनपा स्कूलों में प्रवेश लिया है। सबसे अधिक इंग्लिश मीडियम में ३२ हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।
कुछ वर्षों पहले मनपा स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही थी, लेकिन पिछले २ वर्षों में मनपा स्कूलों की कहानी बदलने लगी है। मनपा स्कूलों में रिकॉर्ड स्तर पर विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इसके लिए एक वर्ष पहले पूर्व पर्यावरण मंत्री और युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे की अगुवाई में ‘एक लक्ष्य… एक लाख’ नाम से एक अभियान शुरू किया गया, जिसके तहत मनपा स्कूलों में प्रवेश के लिए छात्रों को प्रोत्साहन दिया गया। उसका नतीजा यह रहा है कि इस वर्ष ३० जून तक एक लाख दो हजार बच्चों ने मनपा स्कूलों में प्रवेश लिया और १० जुलाई तक यह आंकड़ा १ लाख ५ हजार के पास पहुंच गया।
मनपा स्कूलों में सीबीएससी बोर्ड और एसएससी बोर्ड के स्कूल शुरू होने के बाद अभिभावकों की रुचि मनपा स्कूलों की ओर बढ़ी है। अभिभावकों ने अपने बच्चों को मनपा के इंग्लिश मीडियम के स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगार्इं, प्रवेश के लिए बड़े नेताओं एवं अधिकारियों की सिफारिश भी करवाई। सबसे अधिक इंग्लिश मीडियम में ३२ हजार से अधिक छात्रों ने प्रवेश लिया है, जबकि सबसे कम मराठी मीडियम के स्कूल में प्रवेश लिया है। मनपा के मराठी स्कूलों में मात्र १७,५०० विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया है।





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