मुंबई, पर्यावरण में सुधार लाने के लिए पिछले कई सालों से इको फ्रेंडली मूर्तियों का क्रेज बढ़ा है। पहले डिमांड के हिसाब से मूर्तिकार इको फ्रेंडली मूर्तियों को आकार देते थे लेकिन अब मूर्तिकारों ने रायगढ़ में बनाई जानेवाली बाप्पा की मूर्तियों को अब केवल इको फ्रेंडली टच ही देने का निर्णय लिया है। इसके लिए जेएसडब्ल्यू ग्रुप ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में रहनेवाले मूर्तिकार समुदाय के साथ मिलकर काम करने की पहल की है।
बता दें कि इस अनोखी साझेदारी से `जेएसडब्ल्यू इको-फ्रेंडली गणेश उत्सव’ के तौर पर एक सामुदायिक उत्सव के आयोजन की शुरुआत हुई है, जो रंग अभिमानाचा (गौरव के रंग) की थीम पर आधारित है। इस सामुदायिक उत्सव के माध्यम से, इस साल की गणेश चतुर्थी के दौरान मूर्तिकारों को गणपति की मूर्तियों को पेंट करने के लिए पर्यावरण-अनुकूल रंगों के इस्तेमाल के बारे में जागरूक करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
मुंबई, पुणे और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में बेची जानेवाली गणपति की ज्यादातर मूर्तियों को रायगढ़ जिले में ही तैयार किया जाता है। मूर्तिकार समुदाय द्वारा बनाई गई गणपति की मूर्तियां महाराष्ट्र के साथ-साथ दुनियाभर के कई बाजारों में भी बेहद लोकप्रिय हैं। इसी वजह से पेण गांव को `गणेश की मूर्तियों का घर’ के नाम से भी जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मूर्तिकार रहते हैं। महाराष्ट्र में हर साल इस उत्सव के दौरान लाखों मूर्तियों को झीलों, नदियों और समुद्र में विसर्जित किया जाता है। `जेएसडब्ल्यू इको-फ्रेंडली गणेश उत्सव’ का उद्देश्य, समाज में लोगों को कम हानिकारक रंगों का उपयोग करने तथा समुद्री जीव-जंतुओं की जिंदगी पर मंडराते खतरे को कम करने के लिए लोगों को जागरूक करना है।





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